RBI ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए रेपो रेट को **25 बेसिस पॉइंट्स** बढ़ाकर **5.50%** कर दिया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहला मौका है जब ब्याज दरों में इजाफा हुआ है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा फैसला लेते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा किया है, जिसके बाद यह दर 5.50% हो गई है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने अपनी स्टैंडिंग में बदलाव करते हुए अब इसे 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) की ओर शिफ्ट कर दिया है। यह कदम बढ़ती महंगाई को थामने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।
इकोनॉमी का आउटलुक
महंगाई की चुनौती के बावजूद RBI भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर आश्वस्त है। केंद्रीय बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि RBI का मानना है कि अर्थव्यवस्था बढ़ी हुई ब्याज दरों का दबाव झेलने में सक्षम है।
क्या आम आदमी की EMI बढ़ेगी?
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर आपके लोन पर पड़ने वाला है। होम लोन, पर्सनल लोन और ऑटो लोन जैसे अधिकांश रिटेल क्रेडिट सीधे रेपो रेट से जुड़े होते हैं। जैसे ही बैंक इस बढ़त का बोझ ग्राहकों पर डालेंगे, वैसे ही आपकी मंथली EMI बढ़ सकती है या फिर लोन का टेन्योर लंबा हो सकता है। रियल एस्टेट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टरों पर अब निवेशकों की नजरें होंगी, क्योंकि यहां डिमांड पर असर पड़ सकता है।
शेयर बाजार और बैंकिंग सेक्टर
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर इक्विटी मार्केट पर भी दिखेगा, क्योंकि कंपनियों के लिए कैपिटल की लागत बढ़ जाती है। हालांकि, बैंकों और NBFCs के लिए यह स्थिति मिली-जुली हो सकती है। जहां एक तरफ उन्हें बढ़े हुए लोन रेट्स से नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार दिख सकता है, वहीं दूसरी ओर कर्जदारों की क्रेडिट क्वालिटी पर नजर रखना उनके लिए एक नई चुनौती होगी। आने वाले समय में RBI का रुख पूरी तरह से डेटा-डिपेंडेंट होगा, जिससे बाजार को अब ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम ही रखनी चाहिए।
