रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने महंगाई को काबू में रखने के लिए रेपो रेट में **25** बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है। अब नई दर **5.50%** हो गई है, जिसका सीधा असर आम आदमी की EMI पर पड़ना तय है।
महंगाई के दबाव को देखते हुए RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने अपने स्टैंड को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' में बदल दिया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब दरों में इजाफा किया गया है। ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और जारी भू-राजनीतिक तनाव को इस फैसले की मुख्य वजह माना जा रहा है।
इकोनॉमी और क्रेडिट ग्रोथ पर असर
RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% रखा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक का मानना है कि अब बैंक क्रेडिट ग्रोथ, जो हाल ही में 18% से ऊपर थी, उसमें कमी आएगी। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि अर्थव्यवस्था में इन बढ़ी हुई लागतों को झेलने की क्षमता है, लेकिन बैंकों को अब आक्रामक लेंडिंग के बजाय अपने डिपॉजिट बेस को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।
आम आदमी और बैंकों की चुनौतियां
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर लोन लेने वालों पर पड़ेगा। फ्लोटिंग-रेट लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI में बढ़ोतरी होना लगभग तय है। वहीं, बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए चुनौती यह है कि वे बढ़ती फंडिंग कॉस्ट को ग्राहकों पर कितनी कुशलता से डाल पाते हैं। फिलहाल के लिए, केंद्रीय बैंक ने निकट भविष्य में रेट कट की संभावना से इनकार कर दिया है और फोकस पूरी तरह से स्थिरता बनाए रखने पर है।
