Reserve Bank of India ने आम आदमी को बड़ा झटका देते हुए रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी की है। इसके बाद दरें **5.50%** पर पहुंच गई हैं। महंगाई पर लगाम लगाने के लिए RBI ने अपने रुख को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) में बदल दिया है।
लोन और सेविंग्स पर असर
ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आपके लोन की किस्तों यानी EMI पर पड़ेगा। रेपो रेट से जुड़े होम, ऑटो और पर्सनल लोन अब महंगे हो जाएंगे। इसका मतलब है कि या तो आपकी मंथली EMI बढ़ेगी या फिर लोन का टेन्योर (tenure) लंबा हो जाएगा। हालांकि, दूसरी तरफ सेविंग्स करने वालों के लिए यह एक अच्छी खबर है। Bajaj Finance जैसे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स ने पहले ही अपने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रेट्स बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिससे सुरक्षित निवेश पर बेहतर रिटर्न की उम्मीद बढ़ गई है।
GDP और महंगाई का गणित
सख्त मौद्रिक नीति के बावजूद, RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा जताया है। सेंट्रल बैंक ने वित्त वर्ष FY27 के लिए GDP ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि मजबूत एक्सपोर्ट और फैक्ट्रियों में बढ़ते उत्पादन से ग्रोथ को सपोर्ट मिल रहा है। हालांकि, बढ़ती महंगाई एक चिंता का विषय है। खाने-पीने की चीजों के दाम, ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल की अस्थिरता और पश्चिम एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण महंगाई का दबाव बना हुआ है।
मार्केट पर दबाव
इस फैसले के बाद शेयर बाजार में हलचल है। रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स पर दबाव देखा जा रहा है। निवेशकों को डर है कि कर्ज महंगा होने से कंज्यूमर डिमांड घट सकती है, जिसका असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ सकता है। अब मार्केट की नजर अगली महंगाई के आंकड़ों पर टिकी है।
