RBI का बड़ा कदम: Repo Rate बढ़ाकर **5.50%** किया, FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाया

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI का बड़ा कदम: Repo Rate बढ़ाकर **5.50%** किया, FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ाया

RBI ने महंगाई पर लगाम लगाने के लिए रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी की है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान **7.1%** कर दिया है, जिसका असर कंपनियों के लोन और आपकी जेब पर पड़ेगा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा कर इसे 5.50% पर सेट कर दिया है। यह फैसला 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) के रुख को दर्शाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य महंगाई को काबू में रखना है।

मुनाफे से ऊपर इकोनॉमी की स्टेबिलिटी

गवर्नर मल्होत्रा ने साफ किया कि RBI का मुख्य लक्ष्य कमर्शियल प्रॉफिट कमाना नहीं है। विदेशी मुद्रा जमा के लिए कंसेशनल स्वैप विंडो के जरिए $133 बिलियन की लिक्विडिटी जुटाई गई है। हालांकि इन ऑपरेशंस की लागत सरकारी सरप्लस ट्रांसफर को प्रभावित करती है, लेकिन केंद्रीय बैंक का मानना है कि देश की इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के लिए यह जरूरी है।

इकोनॉमिक आउटलुक: ग्रोथ की रफ्तार

RBI ने भारत की विकास दर पर भरोसा जताते हुए FY27 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि देश की इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अब सस्ते कर्ज का दौर धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।

निवेशकों के लिए जोखिम और मार्केट असर

बढ़ते ब्याज दरों का सीधा असर कंपनियों के कर्ज पर पड़ेगा, जिससे उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। खास तौर पर ज्यादा कर्ज वाली कंपनियों (Debt-heavy sectors) के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव एक बड़ा रिस्क बना हुआ है। अब बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बैंक अपने लेंडिंग रेट्स में कितनी तेजी से बदलाव करते हैं और महंगाई के नए आंकड़े भविष्य में क्या रुख तय करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.