RBI ने महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिससे अब यह दर **5.50%** हो गई है। इसके साथ ही सेंट्रल बैंक ने वित्तीय बाजारों के लिए एक नई टेक्निकल कमेटी बनाने का फैसला लिया है।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में आज महंगाई पर लगाम कसने के लिए बड़ा फैसला लिया गया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब रेपो रेट में बढ़ोतरी की गई है। यह कदम संकेत देता है कि सेंट्रल बैंक अब इकोनॉमी में टाइटनिंग की ओर बढ़ रहा है ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे।\n\n### नई कमेटी और पारदर्शिता पर जोर\n\nरेपो रेट बढ़ाने के साथ ही RBI ने वित्तीय बाजारों के लिए एक 'टेक्निकल कंसल्टेटिव कमेटी' (Technical Consultative Committee) के गठन की घोषणा की है। इस मंच का उद्देश्य बैंक और बाजार के भागीदारों के बीच बातचीत को और ज्यादा प्रोफेशनल बनाना है ताकि ऑपरेशनल चुनौतियों को जल्द सुलझाया जा सके। इसके अलावा, रेगुलेटर ने डेटा शेयरिंग के नए नियम जारी किए हैं, जो अकाउंट एग्रीगेटर्स (Account Aggregators) और कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट्स (CAS) में पारदर्शिता लाएंगे। इससे उधार देने वाले संस्थानों को कर्जदारों की सेहत को समझने में ज्यादा मदद मिलेगी।\n\n### निवेशकों और आम आदमी पर असर\n\nरेपो रेट बढ़ने का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। अब होम, ऑटो और पर्सनल लोन महंगे हो सकते हैं। बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी, क्योंकि इन सेक्टरों पर ब्याज दरों का सबसे अधिक असर पड़ता है।\n\nआने वाले समय में मार्केट यह देखेगा कि कंपनियां बढ़ती ब्याज दरों के साथ कैसे तालमेल बिठाती हैं और क्रेडिट ग्रोथ कितनी मजबूत रहती है। RBI ने ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव और साइबर खतरों जैसे रिस्क फैक्टर्स के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी है। अब सभी की निगाहें बड़े बैंकों के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर हैं कि वे अपनी लेंडिंग रेट्स में क्या बदलाव करते हैं।
