RBI Governor Sanjay Malhotra ने बैंकों को चेतावनी दी है कि लंबे समय तक इकोनॉमिक स्टेबिलिटी रहने का मतलब यह नहीं है कि जोखिम लेने की छूट मिल गई है। बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितताओं और AI-ड्रिवन रिस्क को देखते हुए रेगुलेटर ने बैंकों को संभलकर रहने को कहा है।
बैंकों के लिए RBI का कड़ा संदेश
नई दिल्ली में आयोजित 5th Kautilya Economic Conclave में RBI Governor Sanjay Malhotra ने साफ कर दिया है कि फाइनेंशियल सिस्टम में फिलहाल सब कुछ ठीक दिख रहा है, लेकिन बैंकों को आत्ममुग्धता (complacency) से बचना होगा। गवर्नर ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे पुराने आर्थिक संकट की यादें धुंधली होती हैं, बैंकों में रिस्क लेने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जो लंबी अवधि में खतरनाक साबित हो सकती है।
ग्लोबल मार्केट के 5 बड़े खतरे
गवर्नर ने बैंकों को खास तौर पर इन 5 बड़े ग्लोबल रिस्क के प्रति सावधान किया है:
- ग्लोबल डेट (Debt): दुनिया भर में बढ़ता कर्ज का बोझ।
- AI एसेट वैल्युएशन: AI सेक्टर में ओवर-वैल्यूड एसेट्स से जुड़े जोखिम।
- हाई लेवरेज: अत्यधिक उधार लेकर किया गया कारोबार।
- प्राइवेट क्रेडिट: इस सेगमेंट में बढ़ते रिस्क।
- साइबर हमले: डिजिटल फाइनेंशियल सिस्टम पर मंडराता खतरा।
'Evergreening' पर लगा लगाम
इस सख्ती के पीछे एक बड़ी वजह 1 अक्टूबर, 2026 से लागू हुए नए नियम हैं। RBI ने अब बैंकों को यह अनुमति देना बंद कर दिया है कि वे अपने एनपीए (NPA) या स्ट्रेस्ड एसेट्स को वापस उन्हीं कर्जदारों या संबंधित लोगों को बेच सकें। इसका सीधा मकसद लोन 'evergreening' को रोकना है, जहां बैंक खराब लोन को छुपाने के लिए उसे बार-बार रोल-ओवर कर देते थे।
निवेशकों के लिए संकेत
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI का यह रुख आने वाली तिमाहियों में बैंकों की अर्निंग्स पर असर डाल सकता है। निवेशकों को अब बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ के साथ-साथ उनके Asset Quality और मैनेजमेंट की कमेंट्री पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि रेगुलेटर की नजर अब हर एक लोन बुक पर है।
