RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फिनटेक कंपनियों को कड़ी नसीहत दी है कि वे ग्राहकों के डेटा को कमाई का साधन न समझें। जैसे-जैसे फिनटेक कंपनियां बड़ी हो रही हैं, उन पर साइबर सुरक्षा और ऑपरेशनल रेजिलिएंस की जिम्मेदारी बढ़ती जाएगी, जो निवेशकों के लिए सतर्क होने का संकेत है।
डेटा है 'ट्रस्ट', कमोडिटी नहीं
मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ शब्दों में कहा कि फिनटेक कंपनियों को डेटा को सिर्फ एक 'बिजनेस एसेट' के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कंपनियां मुनाफे को ग्राहकों की सुरक्षा से ऊपर रखेंगी, तो इससे पूरे फाइनेंशियल सिस्टम का भरोसा डगमगा सकता है।
बड़ी कंपनियों के लिए बढ़ेंगे नियम
गवर्नर के अनुसार, शुरुआती दौर की स्टार्टअप्स के लिए नियम आसान हो सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे ये कंपनियां स्केल करती हैं, इनकी जवाबदेही बढ़ जाती है। अब इन कंपनियों को सिर्फ अपना मुनाफा नहीं देखना है, बल्कि देश के पूरे फाइनेंशियल सिस्टम की स्थिरता और साइबर सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी। यह स्पष्ट संकेत है कि बड़ी फिनटेक कंपनियों पर अब Compliance का बोझ बढ़ने वाला है, जिससे उनके मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
AI और टेक्नोलॉजी पर RBI की नजर
RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने फिनटेक में बढ़ते AI इस्तेमाल पर तीन बड़े खतरे बताए हैं: स्पीड, कंसंट्रेशन और ओपेसिटी (पारदर्शिता की कमी)। उन्होंने कहा कि क्लाउड और टेक प्रोवाइडर्स पर अत्यधिक निर्भरता एक जोखिम पैदा कर रही है। RBI अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लोन अप्रूवल या फ्रॉड डिटेक्शन जैसे कामों में इस्तेमाल होने वाले AI टूल्स में कोई बायस (पूर्वाग्रह) न हो।
सैंडबॉक्स का इस्तेमाल करने की सलाह
सेंट्रल बैंक ने कंपनियों को आगाह किया है कि वे रेगुलेशन में खामियों का फायदा उठाकर बिजनेस मॉडल न बनाएं। RBI ने कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स को Regulatory Sandbox में टेस्ट करने की सलाह दी है, ताकि भविष्य में होने वाली कानूनी दिक्कतों से बचा जा सके। हाल ही में United Fintech Forum को SRO (Self-Regulatory Organization) के रूप में मान्यता मिलना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
