RBI ने Fintech सेक्टर को दी चेतावनी: तकनीक की रफ्तार और बढ़ती निर्भरता से बढ़ सकता है रिस्क

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI ने Fintech सेक्टर को दी चेतावनी: तकनीक की रफ्तार और बढ़ती निर्भरता से बढ़ सकता है रिस्क

RBI के डिप्टी गवर्नर Rohit Jain ने चेतावनी दी है कि ऑटोमेशन की तेज रफ्तार और कुछ चुनिंदा क्लाउड वेंडर्स पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता पूरे फाइनेंशियल सेक्टर के लिए खतरा बन सकती है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में उन्होंने कहा कि बैंकों और फिनटेक कंपनियों को अब अपनी ऑपरेशनल रेजिलिएंस (Operational Resilience) पर खास ध्यान देना होगा।

मुंबई में आयोजित Global Fintech Fest 2026 के दौरान Reserve Bank of India (RBI) के डिप्टी गवर्नर Rohit Jain ने भारतीय फाइनेंशियल सेक्टर में तेजी से अपनाई जा रही नई तकनीकों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने मुख्य रूप से तीन बड़े खतरों—स्पीड, कंसंट्रेशन और ओपेसिटी (Opacity)—को रेखांकित किया है, जो भविष्य में फाइनेंशियल सिस्टम की स्थिरता के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकते हैं।

तकनीक की रफ्तार बनाम सुरक्षा

जैन ने स्पष्ट किया कि तकनीक ने भले ही बैंकिंग को तेज और आसान बना दिया है, लेकिन इसने नए जोखिम भी पैदा किए हैं। आधुनिक ऑटोमेटेड सिस्टम इतनी रफ्तार से काम करते हैं कि यदि कोई गलती होती है, तो इंसान के हस्तक्षेप से पहले ही उसका असर व्यापक हो सकता है। बैंकों को अब ऐसे सिस्टम की जरूरत है जो खामियों को तुरंत पहचानें और उसे फौरन रोक सकें।

'सिंगल पॉइंट ऑफ फेल्योर' का डर

RBI की सबसे बड़ी चिंता क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को लेकर है। आज बैंकिंग से लेकर फिनटेक कंपनियां एक जैसे चुनिंदा वेंडर्स पर टिकी हैं। अगर किसी एक बड़े क्लाउड प्रोवाइडर या टेक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में कोई टेक्निकल दिक्कत या साइबर अटैक होता है, तो पूरा फाइनेंशियल इकोसिस्टम एक साथ ठप हो सकता है।

AI और एल्गोरिदम का काला सच

जैन ने 'ओपेसिटी' पर भी सवाल उठाए। आज कंपनियां क्रेडिट या ट्रेडिंग फैसलों के लिए जिस तरह से कॉम्प्लेक्स AI और एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर रही हैं, उनकी कार्यप्रणाली समझना मुश्किल होता जा रहा है। पारदर्शिता की कमी के कारण भविष्य में रेगुलेटर्स के लिए सिस्टम में मौजूद बायस या गलतियों को पकड़ना चुनौतीपूर्ण होगा।

निवेशकों के लिए संकेत

इस बयान के बाद यह साफ है कि आने वाले समय में RBI बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर सख्ती बढ़ा सकता है। आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, बैकअप सिस्टम और एल्गोरिदम ट्रांसपेरेंसी के लिए नए कड़े नियम लाए जा सकते हैं। हालांकि इससे सिस्टम सुरक्षित होगा, लेकिन कंपनियों का कंप्लायंस और ऑपरेशनल खर्चा भी बढ़ सकता है। निवेशकों को भविष्य में आने वाले RBI के सर्कुलर पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये सेक्टर के टेक खर्च और मुनाफे पर सीधा असर डाल सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.