भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार और शेयर बाजार की सुस्ती के बीच RBI ने बड़ा अंतर पाया है। जहां सरकारी बॉन्ड मार्केट में अनुशासन दिख रहा है, वहीं ग्लोबल स्तर पर AI सेक्टर में पैसा जाने से इक्विटी मार्केट दबाव में है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की मजबूत मैक्रो-इकॉनॉमिक परफॉरमेंस और मौजूदा शेयर बाजार की स्थिति के बीच बढ़ते फासले पर चिंता जताई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने साफ किया कि भारत की रियल इकॉनमी लगातार मजबूती दिखा रही है, लेकिन स्टॉक मार्केट इस उत्साह को पूरी तरह से नहीं दर्शा पा रहा है।
बॉन्ड मार्केट में अनुशासन का असर
जहां इक्विटी मार्केट उतार-चढ़ाव से जूझ रहा है, वहीं घरेलू बॉन्ड मार्केट ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। RBI ने इसकी मुख्य वजह सरकार की फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) के प्रति प्रतिबद्धता को बताया है। इस अनुशासन के कारण भारतीय डेट इंस्ट्रूमेंट्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी रेजिलिएंट बने हुए हैं। हालांकि, यह स्थिरता लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में रैली में नहीं बदल पाई है।
ग्लोबल कैपिटल और AI का नया दौर
केंद्रीय बैंक ने मार्केट की सुस्ती के पीछे एक बड़ा कारण ग्लोबल कैपिटल के बदलते समीकरणों को बताया है। वर्तमान में वैश्विक निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दांव लगा रहे हैं। फंड्स का यह री-एलोकेशन भारतीय बाजारों से पूंजी को खींच रहा है, भले ही भारतीय कंपनियों के फंडामेंटल्स मजबूत क्यों न हों।
फंडामेंटल्स और प्राइसिंग का अंतर
नीति निर्माताओं का मानना है कि वर्तमान मार्केट प्राइसिंग भारत की विकास गाथा की मजबूती को पूरी तरह से नहीं पकड़ पा रही है। RBI इसे एक अस्थायी मिसमैच मानता है। उम्मीद यह है कि जैसे-जैसे घरेलू डेटा और बेहतर होगा, मार्केट सेंटीमेंट का इकॉनमी की वास्तविक स्थिति के साथ तालमेल बैठ जाएगा। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे केवल सेंटीमेंट पर न चलें, बल्कि कंपनियों के परफॉरमेंस और इकोनॉमिक इंडिकेटर्स पर नजर बनाए रखें।
