Reserve Bank of India (RBI) ने डॉलर-रुपया स्वैप के लिए साप्ताहिक समय सीमा की बंदिशें हटा दी हैं। अब **$10 करोड़** से अधिक के बड़े ट्रांजैक्शन तेजी से हो सकेंगे। जून से अब तक **$72 अरब** से ज्यादा का इनफ्लो आ चुका है, जिस पर निवेशकों की नजरें टिकी हैं।
नियमों में बदलाव का मकसद
Reserve Bank of India ने बैंकों को बड़ी फॉरेन करेंसी इनफ्लो को मैनेज करने के लिए अब ज्यादा ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी दी है। पहले $10 करोड़ से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए सख्त साप्ताहिक विंडो का पालन करना पड़ता था, जिससे फंड मोबिलाइजेशन में देरी होती थी। अब इस लॉजिस्टिकल बाधा को हटा दिया गया है, जिससे FCNR(B) स्कीम के तहत पैसा तेजी से सिस्टम में आ पाएगा।
इनफ्लो का गणित
जून 2026 से शुरू हुई इस विशेष स्वैप सुविधा के जरिए अब तक कुल $72.85 अरब की विदेशी मुद्रा आ चुकी है। इसमें से $65.40 अरब यानी करीब 90% हिस्सा अकेले FCNR(B) स्कीम से आया है। बाकी का हिस्सा Overseas Foreign Currency Borrowings (OFCBs) और External Commercial Borrowings (ECBs) के जरिए जुटाया गया है।
डेडलाइन का उलटा काउंटडाउन
RBI ने जहां एक तरफ प्रक्रिया को आसान बनाया है, वहीं FCNR(B) मोबिलाइजेशन के लिए समय सीमा को भी सख्त किया है। बैंकों के पास अब डिपॉजिट जुटाने की आखिरी तारीख 31 अगस्त, 2026 है, जबकि स्वैप डील पूरी करने की डेडलाइन 11 सितंबर, 2026 तय की गई है। वहीं, ECBs और OFCBs के लिए यह सुविधा 31 दिसंबर, 2026 तक खुली रहेगी।
बाजार पर असर
यह समझना जरूरी है कि ये डॉलर स्वैप अस्थायी रूप से फॉरेक्स रिजर्व को तो बढ़ाते हैं, लेकिन ये परमानेंट एडिशन नहीं हैं। RBI के पास इन डॉलर को वापस करने की भविष्य की जिम्मेदारी (Maturity Obligation) होगी। चूंकि ये डॉलर सीधे RBI के रिजर्व में जाते हैं, इसलिए इनका रुपये की वैल्यू पर कोई खास असर नहीं दिख रहा है। निवेशकों के लिए अब 31 अगस्त की डेडलाइन सबसे अहम है, जिस पर बाजार की पैनी नजर रहेगी।
