रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम से एक्स्ट्रा लिक्विडिटी कम करने के लिए **₹1.42 लाख करोड़** की निकासी की है। यह कदम **27 अगस्त, 2026** को एक ओवरनाइट VRRR ऑक्शन के जरिए उठाया गया है।
सेंट्रल बैंक का मानना है कि बैंकिंग सिस्टम में अभी सरप्लस कैश काफी ज्यादा है, जो ₹3.75 लाख करोड़ के स्तर के करीब पहुंच गया था। जब बैंकों के पास आइडल कैश ज्यादा होता है, तो वे इसे बहुत कम दरों पर उधार देने लगते हैं, जिससे शॉर्ट-टर्म बरोइंग कॉस्ट अनकंट्रोल्ड हो सकती है।
ऑक्शन का पूरा गणित
RBI ने इस बार ₹2 लाख करोड़ तक की निकासी का लक्ष्य रखा था, लेकिन बैंकों ने ₹1.42 लाख करोड़ के लिए ही पार्टिसिपेट किया। इस एक्सरसाइज का सीधा असर 'वेटेड एवरेज कॉल रेट' (WACR) पर पड़ा है, जो 5.18% से बढ़कर अब 5.21% हो गया है। वहीं, 'स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी' (SDF) रेट 5% पर स्थिर बना हुआ है।
आगे क्या होगा?
इस लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए RBI ने अब 28 अगस्त, 2026 को एक और तीन दिन का बड़ा ऑक्शन प्लान किया है, जिसमें ₹3 लाख करोड़ सोखने का लक्ष्य है। निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि ये ऑक्शन शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट यील्ड्स को प्रभावित करते हैं। अगर सरकारी खर्च या टैक्स आउटफ्लो में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो लिक्विडिटी का यह गणित तेजी से बदल सकता है।
