Rupee Strength: रुपये को बचाने के लिए RBI का बड़ा दांव, तेल कंपनियों को सीधे देगी डॉलर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Rupee Strength: रुपये को बचाने के लिए RBI का बड़ा दांव, तेल कंपनियों को सीधे देगी डॉलर

भारतीय रुपये (Rupee) की गिरती चाल को थामने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने एक नई रणनीति अपनाई है। अब सरकारी तेल कंपनियों को डॉलर की जरूरत पूरी करने के लिए खुले बाजार में नहीं, बल्कि सीधे RBI से मदद मिलेगी।

बाजार पर दबाव कम करने की कोशिश

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब एक नई रणनीति के साथ मैदान में उतरा है, ताकि रुपये को 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक फिसलने से बचाया जा सके। इस नए मैकेनिज्म के तहत, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को उनकी इंपोर्ट जरूरतों के लिए सीधे डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे। इस कदम का मुख्य फायदा यह है कि अब इन कंपनियों को डॉलर खरीदने के लिए ओपन फॉरेक्स मार्केट में नहीं जाना पड़ेगा, जिससे डॉलर की मांग में अचानक आने वाली तेजी पर लगाम लगेगी।

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के ऊंचे यील्ड (Yield) के कारण रुपया लंबे समय से दबाव में है। पहले, जब सरकारी तेल कंपनियां ओपन मार्केट से बड़ी मात्रा में डॉलर खरीदती थीं, तो रुपये में अचानक गिरावट देखने को मिलती थी। RBI का यह कदम करेंसी मार्केट की वोलाटिलिटी (Volatility) को कंट्रोल करने के लिए एक डिफेंसिव टूल की तरह काम करेगा।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

हालांकि यह हस्तक्षेप रुपये को फौरी राहत देता है, लेकिन निवेशकों को यह समझना होगा कि RBI के पास विदेशी मुद्रा भंडार का भी एक सीमित दायरा है। आगे चलकर बाजार की नजरें इस पर होंगी कि यह नीति देश के फॉरेक्स रिजर्व (Forex Reserves) पर कितना असर डालती है। फिलहाल, RBI एक तरफ रुपये की स्थिरता और दूसरी तरफ घरेलू महंगाई और इंटरेस्ट रेट के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.