RBI डेप्युटी गवर्नर रेस: भारत के डिजिटल रुपये और पॉलिसी का भविष्य दांव पर!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI डेप्युटी गवर्नर रेस: भारत के डिजिटल रुपये और पॉलिसी का भविष्य दांव पर!
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में डेप्युटी गवर्नर के पद के लिए एक अहम रेस शुरू हो गई है। चार वरिष्ठ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स—विवेक डीप, रोहित जैन, राधा श्याम राठो और अजय कुमार—इस पोजीशन के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। T Rabi Sankar का कार्यकाल जल्द ही समाप्त हो रहा है, और इस नई नियुक्ति का भारत की मॉनेटरी पॉलिसी की दिशा और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपये के भविष्य पर बड़ा असर पड़ेगा।

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अहम नियुक्ति: कौन संभालेगा RBI में डेप्युटी गवर्नर का पद?

T Rabi Sankar के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के डेप्युटी गवर्नर पद से हटने के साथ ही भारत की फाइनेंसियल पॉलिसी के लिए एक अहम मोड़ आ गया है। Sankar ने 2022 में लॉन्च हुए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पायलट और सरकारी सिक्योरिटीज के लिए नेगोशिएटेड डीलिंग सिस्टम (Negotiated Dealing System) को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कार्यकाल, जो मई 2021 में शुरू हुआ था, मई 2026 की शुरुआत में समाप्त हो रहा है। अब इस महत्वपूर्ण पद के लिए चार वरिष्ठ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स—विवेक डीप, रोहित जैन, राधा श्याम राठो और अजय कुमार—में से किसी एक का चुनाव होना है। इस नियुक्ति का सीधा असर भारत की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) की दिशा और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) यानी डिजिटल रुपये के भविष्य पर पड़ेगा।

चारों दावेदार और उनकी विशेषज्ञता

ये चारों एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स अपनी अलग-अलग विशेषज्ञता लेकर आए हैं। विवेक डीप को करेंसी मैनेजमेंट और पेमेंट सिस्टम का अनुभव है। रोहित जैन महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट ऑफ सुपरविजन (Department of Supervision) की देखरेख करते हैं, जो बैंकों और NBFCs पर निगरानी रखता है। राधा श्याम राठो का बैकग्राउंड फाइनेंशियल मार्केट्स ऑपरेशंस (Financial Markets Operations) और एक्सटर्नल इन्वेस्टमेंट (External Investments) का है, और वे रुपया इंटरनैशनलाइजेशन (Rupee Internationalization) पर बनी वर्किंग ग्रुप का नेतृत्व भी कर चुके हैं। अजय कुमार के पास करेंसी मैनेजमेंट, फॉरेन एक्सचेंज का अनुभव है और वे ऑपरेशनल व रेगुलेटरी फंक्शन्स पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। मार्च 2025 तक, डिजिटल रुपये पायलट के 10 अरब रुपये से ज़्यादा सर्कुलेशन और 60 लाख से ज़्यादा यूज़र्स थे, और इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का अगला चरण नए डेप्युटी गवर्नर के फैसलों पर निर्भर करेगा।

डिजिटल करेंसी का भविष्य और बाज़ार के दांव

T Rabi Sankar की विशेषज्ञता ई-रुपये (e-Rupee) के विकास से जुड़ी रही है, जिसका पायलट फेज 2022 के अंत में शुरू हुआ था। सितंबर 2025 तक, यह पायलट सक्रिय है और इसका लक्ष्य प्रतिदिन 10 लाख ट्रांजेक्शन तक पहुंचना है। आने वाले डेप्युटी गवर्नर पर ई-रुपये के भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की ज़िम्मेदारी होगी, जिसमें एफिशिएंसी और फाइनेंशियल इंक्लूजन को सुरक्षा व गोपनीयता चिंताओं के साथ संतुलित करना शामिल है। इसके अलावा, चुने गए अधिकारी इंटरनल डेट मैनेजमेंट (Internal Debt Management) और सरकारी सिक्योरिटीज मार्केट के विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी नज़र रखेंगे, जो देश की आर्थिक स्थिरता के लिए ज़रूरी हैं।

वैश्विक परिदृश्य और नीतिगत जोखिम

दुनिया भर के सेंट्रल बैंक तेज़ी से डिजिटल करेंसी को अपना रहे हैं, और भारत का ई-रुपये में प्रगति इसे वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाता है। नए डेप्युटी गवर्नर को इन्फ्लेशन मैनेजमेंट और फाइनेंशियल सिस्टम की स्थिरता जैसे व्यापक मैक्रोइकॉनोमिक मुद्दों से भी निपटना होगा। इस महत्वपूर्ण पद के खाली होने और नए अधिकारी के आने से नीतिगत प्राथमिकताओं में सूक्ष्म बदलाव आ सकते हैं। यह भी संभव है कि अगर किसी उम्मीदवार का अनुभव किसी एक विशेष क्षेत्र में ही केंद्रित हो, तो उसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों, जैसे बैंकिंग सुपरविजन, की देखरेख में सीखने की प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है। हालांकि, RBI की अपनी कार्यप्रणाली में निरंतरता और वित्तीय क्षेत्र की मजबूती बनाए रखने की प्रतिबद्धता बनी रहेगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.