RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने Fintech कंपनियों को इनोवेशन के साथ-साथ फाइनेंशियल स्टेबिलिटी पर ध्यान देने की सलाह दी है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में उन्होंने तकनीक से जुड़े तीन मुख्य रिस्क—स्पीड, कंसंट्रेशन और ओपेसिटी—को लेकर आगाह किया है।
आरबीआई का नया मंत्र: 'पर्पज, प्रूडेंस और पॉलिसी'
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने साफ कर दिया है कि फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए। डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने कहा कि आरबीआई का दृष्टिकोण 'पर्पज, प्रूडेंस और पॉलिसी' के तीन स्तंभों पर टिका है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक से केवल फाइनेंशियल एक्सेस न बढ़े, बल्कि अर्थव्यवस्था पर कोई गहरा संकट भी न आए।
ये 3 रिस्क बढ़ा रहे हैं चिंता
सेंट्रल बैंक ने उन चुनौतियों को चिन्हित किया है जो सिस्टम की स्टेबिलिटी को खतरे में डाल सकती हैं:
- स्पीड (Speed): तकनीक की तेज रफ्तार के कारण छोटी सी तकनीकी गलती भी पूरे सिस्टम में पलक झपकते ही फैल सकती है, जिससे बड़ा 'सिस्टमैटिक शॉक' पैदा हो सकता है।
- कंसंट्रेशन (Concentration): फिनटेक कंपनियां सीमित क्लाउड और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स पर निर्भर हैं। यदि इनमें से किसी एक में भी खराबी आती है, तो पूरा फाइनेंशियल सेक्टर ठप हो सकता है।
- ओपेसिटी (Opacity): AI और एडवांस एल्गोरिदम इतने जटिल हैं कि कभी-कभी खुद कंपनियों के लिए भी यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि कोई फाइनेंशियल फैसला क्यों लिया गया, जिससे जोखिम छिपे रह सकते हैं।
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स पर रहेगा फोकस
RBI नई तकनीकों को बिना किसी कठोर नियम के बाधित नहीं करना चाहता। इसके लिए 'रेगुलेटरी सैंडबॉक्स' का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा, जहाँ कंपनियां सुरक्षित माहौल में अपने प्रोडक्ट्स टेस्ट कर सकेंगी। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी जोर दिया कि फिनटेक कंपनियां भविष्य के फाइनेंशियल सिस्टम के लिए अहम पार्टनर हैं, लेकिन फाइनेंशियल इंक्लूजन के साथ सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
आने वाले समय में उन फिनटेक कंपनियों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं जो अपने रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क को आरबीआई की उम्मीदों के मुताबिक अपडेट नहीं करेंगी। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि RBI, AI-संचालित फैसलों और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर भविष्य में क्या कड़े नियम लेकर आता है।
