भारतीय बैंकों के पर्सनल लोन में अगस्त महीने के दौरान **16.9%** की तेजी दर्ज की गई है, जिससे कुल आउटस्टैंडिंग लोन **₹72.9 लाख करोड़** पर पहुंच गया है। हाउसिंग और व्हीकल लोन की मांग में मजबूती देखी गई है, जबकि क्रेडिट कार्ड के क्षेत्र में सुस्ती निवेशकों के लिए एक संकेत है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट की मांग अभी भी बेहद मजबूत बनी हुई है। पर्सनल लोन अब देश के कुल बैंक क्रेडिट का एक-तिहाई हिस्सा बन चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था में इंडिविजुअल बॉरोइंग की भूमिका को स्पष्ट करता है।
प्रमुख सेक्टरों में हलचल
पर्सनल लोन के भीतर हाउसिंग और व्हीकल लोन की मांग सबसे आगे है। हाउसिंग लोन 11.1% बढ़कर ₹35.6 लाख करोड़ पर पहुंच गए हैं, जबकि ऑटोमोटिव सेगमेंट में 19.7% की तेज बढ़ोतरी देखी गई है और इसका कुल आउटस्टैंडिंग ₹7.8 लाख करोड़ हो गया है।
क्रेडिट कार्ड और गोल्ड लोन का हाल
आंकड़े एक बड़ा बदलाव भी दिखा रहे हैं। क्रेडिट कार्ड सेगमेंट की ग्रोथ अगस्त में केवल 3.6% रही है, जो पिछले साल इसी महीने में 4.4% थी। यह सुस्ती या तो कंज्यूमर स्पेंडिंग में बदलाव का संकेत है या फिर बैंकों द्वारा रिस्क मैनेजमेंट के तहत अपनाई जा रही सख्ती का। वहीं, गोल्ड-बेस्ड लोन में 83.2% की तेज रफ्तार बरकरार है और इसका कुल आउटस्टैंडिंग ₹5.6 लाख करोड़ है, हालांकि पिछले साल के 130% के उछाल के मुकाबले इसकी रफ्तार अब सामान्य होती दिख रही है।
इकोनॉमी के अन्य सेक्टरों का प्रदर्शन
बैंकों का कर्ज केवल रिटेल तक सीमित नहीं है। सर्विस सेक्टर में सबसे अधिक 24.3% की वृद्धि के साथ कुल ₹63 लाख करोड़ का क्रेडिट दिया गया है। इसके अलावा, इंडस्ट्रियल सेक्टर में 18.2% और एग्रीकल्चर सेक्टर में 17.2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि बैंकों के बैलेंस शीट पर इस लोन ग्रोथ का क्या असर पड़ता है और वे 'बैड लोन्स' (Bad Loans) को कैसे मैनेज करते हैं।
