अगस्त 2026 में देश में बैंक क्रेडिट में **18.8%** की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस तेजी के पीछे इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर की मजबूत मांग मुख्य वजह है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में देश के 41 शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का क्रेडिट पोर्टफोलियो 18.8% बढ़ा है। यह आंकड़े अर्थव्यवस्था में तेजी के संकेत दे रहे हैं।
सेक्टरवार प्रदर्शन
इंडस्ट्रियल सेक्टर ने इस ग्रोथ में सबसे अहम भूमिका निभाई है। पिछले साल इसी अवधि में जहां इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ महज 7% थी, वहीं इस बार यह उछलकर 18.2% पर पहुंच गई है। खास तौर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर, मेटल, केमिकल और फूड प्रोसेसिंग कंपनियों ने जमकर कर्ज लिया है।
वहीं, सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन और भी दमदार रहा, जहां ग्रोथ 24.3% दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 10.3% था। इसमें NBFCs, प्रोफेशनल सर्विसेज और कमर्शियल रियल एस्टेट का बड़ा योगदान रहा। हाउसिंग और व्हीकल लोन जैसे पर्सनल लोंस भी 16.9% की रफ्तार से बढ़े हैं।
निवेशकों के लिए सावधानी
हालांकि ओवरऑल डेटा अच्छा है, लेकिन कंज्यूमर सेंटीमेंट में बदलाव दिख रहा है। क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग और गोल्ड-बैकड लोंस की डिमांड सुस्त पड़ रही है। यह संकेत है कि लोग अब ऊंचे ब्याज वाले अनसिक्योर्ड लोन लेने से बच रहे हैं या बैंक अपनी लेंडिंग स्टैंडर्ड्स को टाइट कर रहे हैं।
बैंकों के लिए यह क्रेडिट ग्रोथ इनकम के नजरिए से तो अच्छी है, लेकिन आगे चलकर एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर नजर रखना जरूरी होगा। निवेशकों को आने वाली तिमाही नतीजों में यह देखना चाहिए कि बैंक रिस्क मैनेजमेंट कैसे कर रहे हैं और क्या प्रॉफिट मार्जिन बरकरार रह पा रहा है या नहीं।
