RBI ने एक्सपोर्टर्स के लिए विदेशी कमाई को देश में वापस लाने (repatriate) की समय-सीमा को **15 महीने** से घटाकर **9 महीने** कर दिया है। **1 अक्टूबर 2026** से लागू होने वाले इस नए नियम का लक्ष्य डॉलर की लिक्विडिटी बढ़ाना है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी कमाई को लेकर नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनियों को अपनी विदेशी कमाई को पहले से जल्दी भारत लाना होगा। 1 अक्टूबर 2026 से विदेशी मुद्रा में होने वाली कमाई के लिए समय-सीमा 15 महीने से घटकर 9 महीने हो जाएगी। वहीं, जो एक्सपोर्ट भारतीय रुपयों (INR) में बिल किए गए हैं, उनके लिए यह डेडलाइन 18 महीने से कम होकर 12 महीने कर दी गई है। यह नियम फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत लागू किए गए हैं, जो यह तय करते हैं कि सामान भेजने या सर्विस देने के कितने समय के भीतर पैसा भारत आना चाहिए।
क्यों लिया गया यह फैसला?
RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में डॉलर की लिक्विडिटी को तेजी से लाने के लिए है। इससे पहले भी केंद्रीय बैंक ने विदेशी इनफ्लो को बढ़ावा दिया था, जिसके चलते देश में $144 बिलियन का विदेशी निवेश आया था। अब RBI चाहता है कि एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई जल्द से जल्द देश में आए ताकि विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का मैनेजमेंट और बेहतर तरीके से हो सके।
निवेशकों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
शेयर बाजार में लिस्टेड कई कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है, खासकर उन सेक्टर्स पर जो लंबे प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं। कैपिटल गुड्स, हैवी इंजीनियरिंग, स्पेशलाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग और फार्मा कंपनियां, जिनके पेमेंट साइकिल लंबे होते हैं, उन्हें अब अपनी क्रेडिट पॉलिसी में बदलाव करना पड़ सकता है। अगर कंपनियां तय समय में पेमेंट नहीं ला पाती हैं, तो उन्हें कैश फ्लो की कमी को पूरा करने के लिए शॉर्ट-टर्म कर्ज लेना पड़ सकता है, जिससे उनकी बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ेगा।
अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि कंपनियां अपनी आगामी अर्निंग्स कॉल्स (Earnings Calls) में इन नई डेडलाइन्स को लेकर क्या रणनीति साझा करती हैं।
