RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि भारत की महंगाई दर सेंट्रल बैंक के तय दायरे में है। सरकारी अनुशासन के कारण देश ग्लोबल महंगाई के दबाव से बचा हुआ है, जो कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर के लिए अच्छी खबर है।
RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने मुंबई में आयोजित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंकिंग और इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में साफ किया कि भारत की महंगाई दर आरबीआई के अनुमानित दायरे के अंदर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत की इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी ने देश को दुनिया भर की विकसित अर्थव्यवस्थाओं में दिख रहे महंगाई के गंभीर दबाव से काफी हद तक सुरक्षित रखा है।
भारत ने दुनिया के अन्य हिस्सों के विपरीत, अत्यधिक खर्च और स्टिमुलस के चक्र से दूरी बनाए रखी है। फिस्कल डिसिप्लिन यानी वित्तीय अनुशासन पर जोर देने और कर्ज पर निर्भरता कम करने के चलते, देश ने ग्लोबल एनर्जी कीमतों और सप्लाई चेन की अस्थिरता के बीच भी स्थिरता बनाए रखी है। यह संतुलित दृष्टिकोण घरेलू लागत को नियंत्रित रखने में मददगार रहा है, जिससे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को सपोर्ट मिला है।
कर्ज का आउटलुक और बैंकिंग स्थिरता
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भारत के फिस्कल पाथ को लेकर सकारात्मक राय दी है। अनुमान है कि 2031 तक देश के पब्लिक डेट-टू-GDP रेशियो में 5.6% की कमी आ सकती है। निवेशकों के लिए इसका मतलब है सरकार की बैलेंस शीट का मजबूत होना, जिससे लॉन्ग टर्म में कर्ज का रिस्क कम होता है। साथ ही, भारतीय बैंकिंग सेक्टर में भी सुधार आया है और बैड लोन के स्तर में कमी देखी गई है, जो क्रेडिट ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए एक मजबूत आधार है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
भले ही महंगाई RBI के दायरे में हो, लेकिन निवेशकों को ग्लोबल एनर्जी कीमतों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि भारत अभी भी तेल और गैस का बड़ा आयातक है। एनर्जी की कीमतों में अचानक उछाल महंगाई और ट्रेड बैलेंस पर दबाव डाल सकता है। इसके अलावा, RBI का भविष्य में इंटरेस्ट रेट्स को लेकर क्या रुख रहता है, यह बाजार की दिशा तय करने वाला सबसे अहम फैक्टर होगा।
