रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी (Liquidity) निकालने के लिए अपनी दूसरी ओपेन मार्केट ऑपरेशन (OMO) सेल सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। इस नीलामी के जरिए सिस्टम से **₹25,000 करोड़** वापस खींचे गए हैं।
RBI बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी हुई नकदी को नियंत्रित करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। 20 सितंबर तक सिस्टम में सरप्लस लिक्विडिटी बढ़कर करीब ₹6.05 लाख करोड़ तक पहुंच गई थी, जिसे कम करने के लिए RBI ने ओपेन मार्केट ऑपरेशन (OMO) का सहारा लिया है।
RBI को बॉन्ड बेचने की जरूरत क्यों पड़ी?
सिस्टम में इतनी नकदी बढ़ने की कई वजहें हैं। हाल ही में Foreign Currency Non-Resident (FCNR) डिपॉजिट में बढ़ोत्तरी हुई है और सरकार द्वारा वेतन व पेंशन भुगतान के कारण भी बैंकों के पास काफी पैसा जमा हो गया है। जब बाजार में बहुत ज्यादा कैश होता है, तो शॉर्ट-टर्म ब्याज दरें RBI के तय दायरे से नीचे गिर सकती हैं, जिसे रोकने के लिए केंद्रीय बैंक सरकारी सिक्योरिटीज़ बेचकर सिस्टम से पैसा खींच रहा है।
नीलामी के आंकड़े
इस नीलामी में निवेशकों ने अलग-अलग मैच्योरिटी वाले बॉन्ड्स में रुचि दिखाई:
- 6.10% GS 2031: ₹11,512 करोड़
- 7.95% GS 2032: ₹8,758 करोड़
- 6.75% GS 2029: ₹2,300 करोड़
- 7.17% GS 2030: ₹2,250 करोड़
- 7.17% GS 2028: ₹180 करोड़
मार्केट पर असर
इस OMO बिक्री से सरकारी सिक्योरिटीज़ की सप्लाई बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बॉन्ड कीमतों और यील्ड पर पड़ सकता है। बैंकों के पास खड़ी अतिरिक्त नकदी अब कम होगी, जिससे मनी मार्केट रेट्स के स्थिर होने की उम्मीद है। अब बाजार की नजरें 28 सितंबर को होने वाली अंतिम नीलामी पर टिकी हैं, जो कुल ₹1 लाख करोड़ के प्रोग्राम का हिस्सा है।
