RBI की पॉलिसी पर उठा बड़ा सवाल! FCNR-B के अचानक बंद होने और MPC के संकेतों से मार्केट में हलचल

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI की पॉलिसी पर उठा बड़ा सवाल! FCNR-B के अचानक बंद होने और MPC के संकेतों से मार्केट में हलचल

RBI की कार्यशैली पर निवेशकों ने सवाल उठाए हैं। FCNR-B फॉरेक्स स्वैप विंडो को अचानक बंद करने और MPC मिनट्स के उलझे हुए संकेतों ने बॉन्ड मार्केट में बेचैनी बढ़ा दी है, जिससे बॉन्ड यील्ड में तेजी देखी जा रही है।

भरोसे का संकट और RBI का कम्युनिकेशन

केंद्रीय बैंक की कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी को लेकर निवेशकों के बीच निराशा बढ़ रही है। मामला तब बिगड़ा जब RBI ने FCNR-B फॉरेक्स स्वैप विंडो को उम्मीद से पहले ही बंद कर दिया। 5 अगस्त 2026 को आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए थे कि इस विंडो को समय से पहले बंद करने की कोई योजना नहीं है। लेकिन, मात्र 9 दिन बाद ही डेडलाइन को 30 सितंबर से घटाकर 31 अगस्त कर दिया गया। इस बदलाव ने मार्केट को हैरान कर दिया, जबकि इस प्रोग्राम के जरिए कुल फॉरेक्स इनफ्लो $72.8 बिलियन के स्तर पर पहुंच चुका था।

डेट मार्केट में घबराहट

दूसरी तरफ, ब्याज दरों को लेकर आए विरोधाभासी संकेतों ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है। 3 से 5 अगस्त की मीटिंग में MPC ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा और न्यूट्रल स्टैंड बनाए रखा। हालांकि, बाद में जारी हुए मिनट्स में कमेटी के सदस्यों के सुर 'हॉकिश' नजर आए, जिसमें महंगाई के जोखिमों पर जोर दिया गया था।

इस विरोधाभास का असर सीधे तौर पर सरकारी बॉन्ड मार्केट पर पड़ा है। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 6.8% से 6.9% के दायरे में पहुंच गई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पॉलिसी में स्पष्टता और अनुमान लगाने योग्य (predictable) नियमों की कमी से ट्रेडर्स के लिए बॉन्ड पोर्टफोलियो मैनेज करना मुश्किल हो गया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या सेंट्रल बैंक आने वाले समय में अपने बयानों में अधिक पारदर्शिता लाएगा ताकि बाजार का भरोसा फिर से बहाल हो सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.