RBI का बड़ा फैसला: Forex Reserve नियमों पर स्थिति साफ, बैंकों को मिलेगा जीरो ब्याज

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: Forex Reserve नियमों पर स्थिति साफ, बैंकों को मिलेगा जीरो ब्याज

Reserve Bank of India (RBI) ने **$2 मिलियन** से अधिक की करेंसी हेज (Currency Hedge) पर **20%** फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) के नियमों को स्पष्ट कर दिया है। रेगुलेटर ने साफ किया है कि यह रिजर्व नॉन-इंटरेस्ट बेयरिंग कैश के रूप में रखा जाएगा, जिसका सीधा असर बैंकों के ट्रेजरी मुनाफे पर पड़ेगा।

बैंकों पर लागत का बोझ

RBI के इस फैसले के बाद बैंकों को अब 20% की यह राशि केंद्रीय बैंक के पास बिना ब्याज वाले करंट अकाउंट में रखनी होगी। इसका मतलब है कि बैंकों की लिक्विडिटी लॉक हो जाएगी और उस पर उन्हें कोई यील्ड (Yield) नहीं मिलेगी। यह अनिवार्य रूप से बैंकों के लिए एक अतिरिक्त लागत (Operational Cost) है, जिसे वे अपने ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे बैंकों के फॉरेक्स डेरिवेटिव डेस्क के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ना तय है।

किन्हें मिली राहत?

RBI ने कुछ चुनिंदा ट्रांजैक्शंस को इस दायरे से बाहर रखा है। इसमें एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग (ECB), डिविडेंड और नॉन-रेजिडेंट डेट कूपन से जुड़े हेज शामिल हैं। हालांकि ये तकनीकी रूप से करंट अकाउंट पेमेंट हैं, लेकिन RBI इन्हें कैपिटल-अकाउंट ट्रांजैक्शन का विस्तार मान रहा है।

सख्ती से निगरानी के संकेत

बैंकों ने इस नियम में ढील और ट्रांजैक्शन लिमिट बढ़ाने की मांग की थी, जिसे RBI ने सिरे से खारिज कर दिया है। रेगुलेटर ने चेतावनी दी है कि यदि कोई कंपनी या बैंक नियम से बचने के लिए ट्रांजैक्शंस को तोड़ने (Split) की कोशिश करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी। बैंकों को अब डेली बेसिस पर 'सेंट्रलाइज्ड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम' के जरिए रिपोर्ट देनी होगी। निवेशकों को अब बैंकों के अगले क्वार्टरली नतीजों में 'फॉरेक्स इनकम' सेगमेंट पर नजर रखनी चाहिए कि यह नया नियम उनकी बॉटम-लाइन को कितना प्रभावित करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.