Reserve Bank of India (RBI) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने 5 कंपनियों का लाइसेंस रद्द कर दिया है, जबकि 8 अन्य कंपनियों ने स्वेच्छा से अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं।
RBI की सख्ती और सेक्टर में सफाई
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शैडो बैंकिंग सेक्टर को व्यवस्थित करने के लिए 13 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) पर बड़ी कार्रवाई की है। जिन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किए गए हैं, उनमें Dar's Financial Services, Rolta Holding and Finance Corporation, Vasudeo Securities, Parsoli Corporation और A C Choksi Financial Services शामिल हैं। यह कदम आमतौर पर तब उठाया जाता है जब कंपनियां नेट-ओनड फंड की शर्तों को पूरा करने में विफल रहती हैं या नियमों का पालन नहीं करती हैं।
खुद लाइसेंस क्यों लौटा रही हैं कंपनियां?
दूसरी ओर, Anupam Mercantile, Grand Motor and Finance, Sky Limit International Finance, और ASA International India Microfinance जैसी 8 कंपनियों ने अपने लाइसेंस सरेंडर कर दिए हैं। इनके अलावा Anagram Industries और CDN Finance ने भी बिजनेस मॉडल बदलने के कारण बाहर निकलने का फैसला किया है। इनमें से कई कंपनियां अब कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग या मर्जर के कारण एनबीएफसी के दायरे से बाहर हो गई हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
यह कदम RBI के 'स्केल-बेस्ड रेगुलेशन' (SBR) फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिसका मकसद फाइनेंशियल सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। बढ़ते कंप्लायंस बोझ के कारण कई छोटी कंपनियां बाजार से बाहर हो रही हैं। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी NBFC में निवेश करने से पहले यह जांच लें कि कंपनी RBI की सक्रिय सूची में है या नहीं। यह कदम भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम को और अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास है।
