RBI के सामने नई चुनौती: ₹14 लाख करोड़ की सरप्लस लिक्विडिटी को खपाने की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI के सामने नई चुनौती: ₹14 लाख करोड़ की सरप्लस लिक्विडिटी को खपाने की तैयारी

देश के बैंकिंग सिस्टम में विदेशी निवेश के चलते **$136 बिलियन** का सैलाब आया है, जिससे लिक्विडिटी बढ़कर **₹14 लाख करोड़** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। अब RBI इस अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए सरकारी बॉन्ड बेचने की योजना बना रहा है।

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार ने इतिहास रचते हुए $786 बिलियन का आंकड़ा छू लिया है। यह बड़ी सफलता तो है, लेकिन इसके साथ ही बैंकिंग सिस्टम में नकदी का भारी दबाव भी पैदा हो गया है। जब RBI बाजार से डॉलर खरीदता है, तो बदले में सिस्टम में रुपये की सप्लाई बढ़ जाती है, जिससे शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट्स गिर रहे हैं। यह एक तरह से अनचाही 'इंटरेस्ट रेट कट' जैसा असर डाल रहा है, जो कि 6% के करीब चल रही महंगाई के लिए चिंता का विषय है।

बॉन्ड मार्केट पर असर

इकोनॉमी को ओवरहीट होने से बचाने के लिए RBI ने सितंबर में ₹1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने का फैसला किया है। इसका मकसद सिस्टम से अतिरिक्त कैश को खींचना है। हालांकि, यह कदम जोखिम भरा है; यदि बॉन्ड की बिक्री बहुत तेजी से होती है, तो यील्ड बढ़ सकती है, जिससे सरकार और कंपनियों के लिए उधार लेना महंगा हो जाएगा।

बैंकों के लिए दोधारी तलवार

वर्तमान में बैंकों की डिपॉजिट ग्रोथ 17.8% (साल-दर-साल) पर है, जिससे उन्हें शॉर्ट-टर्म फंडिंग के लिए महंगी दरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है। लेकिन, जरूरत से ज्यादा सस्ती नकदी के कारण बैंकों में आक्रामक लैंडिंग (aggressive lending) की होड़ मच सकती है, जो भविष्य के लिए रिस्की साबित हो सकती है।

फिलहाल, निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या केंद्रीय बैंक बॉन्ड मार्केट में अस्थिरता पैदा किए बिना इस सरप्लस को मैनेज कर पाएगा। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल इंटरेस्ट रेट्स पहले से ही 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड पर दबाव बना रहे हैं, जो फिलहाल 7% के पास ट्रेड कर रही है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.