सिस्टम में बढ़ती अतिरिक्त नकदी (Excess Liquidity) को मैनेज करने के लिए RBI ने 8 अक्टूबर को **₹2 लाख करोड़** के 29-दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन का ऐलान किया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में चल रहे अतिरिक्त पैसे को निकालने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वर्तमान में बैंकों के पास लगभग ₹4.99 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी (Surplus Liquidity) मौजूद है, जिससे शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट्स के गिरने का डर बना रहता है। इसे संतुलित करने के लिए केंद्रीय बैंक ₹2 लाख करोड़ का 29-दिवसीय VRRR ऑक्शन आयोजित करेगा।
ऑक्शन की पूरी डिटेल्स
यह नीलामी 8 अक्टूबर, 2026 को होगी और इसका मैच्योरिटी पीरियड 6 नवंबर, 2026 तक है। इसका मुख्य उद्देश्य सिस्टम से नकदी को अस्थायी रूप से हटाना है ताकि मनी मार्केट की दरें रेपो रेट के करीब बनी रहें।
बैंकों के लिए लचीलापन (Flexibility)
RBI ने इस बार बैंकों के लिए एक बड़ी राहत भी दी है। अगर बैंकों को अचानक कैश की जरूरत पड़ती है, तो वे E-Kuber पोर्टल के जरिए समय से पहले फंड्स की निकासी (Premature Reversal) कर सकते हैं। इसके लिए बैंकों को अंतिम मैच्योरिटी तारीख से कम से कम 2 वर्किंग डेज पहले आवेदन करना होगा।
क्यों है यह कदम जरूरी?
यह कोई पॉलिसी रेट में बदलाव नहीं है, बल्कि लिक्विडिटी को कंट्रोल करने का एक टैक्टिकल टूल है। इससे पहले भी RBI ने इसी हफ्ते ओवरनाइट VRRR ऑक्शन के जरिए ₹2.1 लाख करोड़ से ज्यादा की लिक्विडिटी को सोखा था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मार्केट में सरप्लस बना रहता है, तो आने वाले दिनों में RBI इसी तरह के छोटे और शॉर्ट-टर्म ऑपरेशन्स जारी रख सकता है ताकि मार्केट में उतार-चढ़ाव न आए।
