Reserve Bank of India (RBI) ने खाने-पीने की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। जुलाई 2026 में फूड इंफ्लेशन बढ़कर **5.52%** पहुंच गया है, जिसके चलते रेपो रेट को **5.25%** पर स्थिर रखा गया है।
महंगाई का बढ़ा खतरा
Reserve Bank of India (RBI) ने अपने अगस्त 2026 के बुलेटिन में साफ कर दिया है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतों में आ रहे उछाल से हेडलाइन इंफ्लेशन पर दबाव बना हुआ है। हालांकि कोर इंफ्लेशन अभी भी स्थिर है, लेकिन डेटा बताता है कि जुलाई 2026 में रिटेल इंफ्लेशन 4.45% पर रहा, जबकि फूड इंफ्लेशन 5.52% के स्तर को पार कर गया है।
क्यों नहीं घटीं ब्याज दरें?
हालिया मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर ही बरकरार रखने का फैसला लिया गया। RBI फिलहाल न्यूट्रल रुख अपनाए हुए है ताकि देश की जीडीपी ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बना रहे। सेंट्रल बैंक ने इस फाइनेंशियल ईयर के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7% रखा है, लेकिन चेतावनी दी है कि तीसरी तिमाही में इंफ्लेशन 5.9% तक जा सकता है।
इकोनॉमी के लिए चुनौतियां
अर्थव्यवस्था के सामने सबसे बड़ा रिस्क मानसून का है। अगर बारिश सामान्य से कम रही, तो कृषि उत्पादन प्रभावित होगा और फूड सप्लाई घटने से कीमतें और बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और जियोपॉलिटिकल तनाव भी कंपनियों की लागत बढ़ा रहे हैं।
हालांकि कोर इंफ्लेशन 3.9% पर कंट्रोल में है, लेकिन खाने-पीने की चीजों की महंगाई RBI को किसी भी जल्दबाजी में रेट कट लेने से रोक रही है। अब निवेशकों की नजर मानसून की प्रगति और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर टिकी रहेगी।
