RBI Liquidity Action: सिस्टम से बाहर निकाला ₹2.1 लाख करोड़, मार्केट में लिक्विडिटी कंट्रोल की तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI Liquidity Action: सिस्टम से बाहर निकाला ₹2.1 लाख करोड़, मार्केट में लिक्विडिटी कंट्रोल की तैयारी

RBI ने बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी (Cash) को बाहर निकालने के लिए आज एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने ओवरनाइट ऑक्शन के जरिए ₹2.10 लाख करोड़ की निकासी की है, ताकि मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक से पहले शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को स्थिर रखा जा सके।

लिक्विडिटी का गणित

बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा कैश होने के कारण RBI ने सोमवार को एक 'वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो' (VRRR) ऑक्शन आयोजित किया। यह एक तरह से मार्केट से अतिरिक्त कैश को वैक्यूम की तरह सोखने की प्रक्रिया है। 4 अक्टूबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹5.16 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी (Idle Cash) जमा थी, जिसे कंट्रोल करना केंद्रीय बैंक के लिए जरूरी हो गया था।

क्यों निकाला गया इतना कैश?

इस सरप्लस नकदी की मुख्य वजह FCNR डिपॉजिट्स में आने वाला नया फंड और सरकार द्वारा सैलरी-पेंशन पर किया गया खर्च है। जब सिस्टम में बहुत ज्यादा पैसा होता है, तो शॉर्ट-टर्म ब्याज दरें RBI के मनचाहे स्तर से नीचे गिर सकती हैं, जिससे बाजार में असंतुलन पैदा हो सकता है।

निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है?

RBI का यह कदम 5 से 7 अक्टूबर तक चलने वाली MPC मीटिंग के नजरिए से काफी अहम है। मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बढ़ती महंगाई के दबाव में RBI ब्याज दरों को लेकर कोई बड़ा फैसला लेता है।

अगर लिक्विडिटी सही से मैनेज नहीं हुई, तो यह डिमांड-साइड इन्फ्लेशन (महंगाई) को हवा दे सकती है। निवेशकों को सलाह है कि वे MPC के फैसलों पर नजर रखें, क्योंकि यही फैसला तय करेगा कि आने वाले दिनों में बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के लिए उधार लेने की लागत (Borrowing Cost) क्या होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.