भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को बैंकिंग सिस्टम से ₹1.41 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी वापस खींची। सेंट्रल बैंक ने दो वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन के जरिए यह पैसा निकाला, जिसका मकसद अल्पकालिक ब्याज दरों को स्थिर रखना है।
RBI की लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को वित्तीय सिस्टम में फैले अतिरिक्त पैसों को वापस खींचने के लिए एक बड़ा कदम उठाया। RBI ने दो वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन के ज़रिए बैंकिंग सिस्टम से कुल ₹1.41 लाख करोड़ की नकदी को सोख लिया। यह RBI के लिए एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य अल्पकालिक ब्याज दरों (short-term interest rates) को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के लक्ष्यों के अनुसार बनाए रखना है।
ऑक्शन का विवरण
इस नकदी प्रबंधन ऑपरेशन को दो हिस्सों में बांटा गया था। सात-दिन की अवधि वाले ऑक्शन में, RBI ने ₹91,980 करोड़ स्वीकार किए। वहीं, ओवरनाइट ऑक्शन के ज़रिए ₹49,206 करोड़ वापस खींचे गए। दोनों ही ऑक्शन 5.24% के कट-ऑफ और भारित औसत दर (weighted average rate) पर संपन्न हुए। इस दर की पेशकश करके, RBI बैंकों को अपना अतिरिक्त पैसा RBI के पास पार्क करने के लिए प्रोत्साहित करता है, बजाय इसके कि यह पैसा खुले बाज़ार में जाए।
आगे की रणनीति
इस कवायद को जारी रखते हुए, RBI ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 के लिए एक और दो-दिवसीय VRRR ऑक्शन की घोषणा भी की है। इस आगामी ऑपरेशन के लिए ₹1.75 लाख करोड़ की राशि अधिसूचित की गई है। यह दर्शाता है कि सेंट्रल बैंक, बैंकिंग सिस्टम में जमा हो रहे भारी सरप्लस को नियंत्रित करने का इरादा रखता है।
निवेशकों के लिए मायने
बाजार के जानकारों और निवेशकों के लिए, यह कदम बताता है कि RBI यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अतिरिक्त नकदी (excess liquidity) के कारण अल्पकालिक दरें, जैसे कि भारित औसत कॉल रेट (Weighted Average Call Rate - WACR), RBI की इच्छित स्तरों से नीचे न गिरें। जब बैंकिंग सिस्टम में बहुत अधिक नकदी होती है, तो बैंक एक-दूसरे को बहुत कम दरों पर उधार दे सकते हैं, जो RBI की मौद्रिक नीति के लिए अस्थिरता पैदा कर सकता है। इस सरप्लस को सोखकर, RBI यह सुनिश्चित करता है कि अल्पकालिक उधार की लागत स्थिर और अनुमानित बनी रहे।
यह अर्थव्यवस्था में नकदी की कमी का संकेत नहीं है। बल्कि, यह सिस्टम को संतुलित करने के लिए एक तकनीकी ऑपरेशन है। हाल के दिनों में बैंकिंग सिस्टम में ₹3.4 लाख करोड़ से अधिक का सरप्लस देखा गया है, और ये ऑक्शन नियामक के लिए उस अतिरिक्त नकदी को मनी मार्केट में अस्थिरता पैदा करने से रोकने का प्राथमिक तरीका हैं। निवेशक आने वाले दिनों में इन ऑक्शन के नतीजों पर नज़र रख सकते हैं, जो यह संकेत देगा कि सेंट्रल बैंक सिस्टम में कुल मनी सप्लाई को कैसे समायोजित कर रहा है।
