भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को चार दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन के ज़रिये बैंकिंग सिस्टम से **₹1.3 ट्रिलियन** की लिक्विडिटी सोख ली। यह कदम सिस्टम में फंसे अतिरिक्त पैसों को मैनेज करने के लिए उठाया गया है, जो अप्रैल 2026 के बाद सबसे ज़्यादा थे।
Overnight दरों को स्थिर रखने की कोशिश
RBI का यह कदम शॉर्ट-टर्म मनी मार्केट रेट्स को बहुत ज़्यादा गिरने से रोकने के लिए उठाया गया है। हाल ही में, बैंकों के बीच शॉर्ट-टर्म उधारी के लिए एक अहम बेंचमार्क, वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR), दबाव में था। RBI के हस्तक्षेप के बाद, WACR पिछले सत्र के 5.05% से बढ़कर 5.18% हो गया।
RBI का लक्ष्य इन Overnight दरों को पॉलिसी रेपो रेट के करीब बनाए रखना है। अगर बैंकिंग सिस्टम में बहुत ज़्यादा नकदी फंसी रह जाती है, तो Overnight लोन की ब्याज दरें RBI के पॉलिसी कॉरिडोर के निचले स्तर (जो अभी 5% पर है) से नीचे गिर सकती हैं। इन ऑक्शन्स के ज़रिये, RBI सिस्टम से अतिरिक्त नकदी को अस्थायी रूप से हटाता है, जिससे बाज़ार की दरें मॉनेटरी पॉलिसी के लक्ष्यों के अनुरूप बनी रहें।
बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी के हालात
इस ऑक्शन की ज़रूरत इसलिए पड़ी क्योंकि बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी का एक बड़ा जमावड़ा देखा जा रहा था। आंकड़े बताते हैं कि यह सरप्लस हाल ही में ₹3 ट्रिलियन के पार चला गया था, जो अप्रैल 2026 के बाद सबसे ज़्यादा था। ज़्यादा सरप्लस अक्सर मैच्योर हो रही सरकारी सिक्योरिटीज, करेंसी सर्कुलेशन में बदलाव या सरकारी खर्च के पैटर्न जैसे कारणों से होता है। यह 5 अगस्त, 2026 को हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की मीटिंग के बाद पहला बड़ा फाइन-ट्यूनिंग ऑपरेशन है, जहां RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया था।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों और बाज़ार पर नज़र रखने वालों के लिए, सबसे अहम चीज़ है बैंकिंग सिस्टम लिक्विडिटी का ट्रेंड। हालांकि RBI के पास VRRR ऑक्शन जैसे टूल हैं, बाज़ार के प्रतिभागी इस बात पर नज़र रखेंगे कि यह सरप्लस कितने समय तक बना रहता है। भविष्य में सरकारी खर्च या करेंसी के इस्तेमाल में होने वाले बदलाव इस बात को प्रभावित करेंगे कि सिस्टम में कितनी नकदी बनी रहती है। RBI ने यह संकेत दिया है कि वह इन फाइन-ट्यूनिंग ऑपरेशन्स का इस्तेमाल ज़रूरत पड़ने पर करने के लिए तैयार है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मनी मार्केट की स्थितियां संतुलित और RBI की ओवरऑल पॉलिसी के अनुरूप रहें।
