मुंबई में आयोजित RBI की 625वीं सेंट्रल बोर्ड बैठक में सिस्टमिक रिस्क और बैंकिंग सिस्टम की मजबूती पर मंथन किया गया। हालांकि पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन डिपॉजिट सुरक्षा ढांचे की समीक्षा अहम रही।
मुंबई में 30 अक्टूबर, 2026 को गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में RBI की 625वीं सेंट्रल बोर्ड बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र मैक्रो-इकोनॉमिक रिस्क का आकलन और इंटरनल डिपार्टमेंट्स की कार्यक्षमता को परखना था ताकि देश की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनी रहे।
डिपॉजिट प्रोटेक्शन पर खास नजर
बैठक का एक अहम हिस्सा 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) की समीक्षा करना था। यह संस्था भारतीय बैंकिंग सेक्टर की रीढ़ है, जो किसी भी बैंक के फेल होने की स्थिति में हर अकाउंट होल्डर को ₹5 लाख तक का इंश्योरेंस कवर प्रदान करती है। इस ढांचे को मजबूत रखकर RBI बैंकिंग सिस्टम में जनता का भरोसा बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है।
ट्रांसपेरेंसी और गवर्नेंस
बैठक में चारों डिप्टी गवर्नर्स की मौजूदगी ने इस चर्चा की गंभीरता को दर्शाया। इसके साथ ही, RBI ने 'विजिलेंस अवेयरनेस वीक 2026' की शुरुआत की, जो रेगुलेटर की इंटरनल ट्रांसपेरेंसी और बेहतर गवर्नेंस के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाता है। निवेशकों के लिए, ऐसी मीटिंग्स इस बात का संकेत हैं कि केंद्रीय बैंक बाजार की अस्थिरता को कम करने और लंबी अवधि में मार्केट की हेल्थ को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय है।
