Tata Sons IPO: क्या लिस्टिंग से बचेगी टाटा संस? पारसी संगठनों ने PM मोदी से लगाई गुहार

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tata Sons IPO: क्या लिस्टिंग से बचेगी टाटा संस? पारसी संगठनों ने PM मोदी से लगाई गुहार

टाटा संस की प्राइवेट पहचान बचाने के लिए छह पारसी संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। RBI ने कंपनी को 'अपर-लेयर' NBFC के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसके चलते इसे **3 साल** के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है।

RBI का फरमान और संकट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 'स्केल-बेस्ड रेगुलेशन' के तहत, 'अपर-लेयर' में आने वाली NBFC कंपनियों के लिए 3 साल के भीतर स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस मुख्य रूप से टाटा ट्रस्ट द्वारा नियंत्रित है, जो ग्रुप की कंपनियों से मिलने वाले डिविडेंड (Dividend) का उपयोग परोपकारी कार्यों में करती है।

संगठनों की दलील

बॉम्बे पारसी पंचायत और फेडरेशन ऑफ पारसी जोरोस्ट्रियन एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका सहित कुल छह संगठनों का तर्क है कि टाटा ग्रुप का स्वरूप इसकी निजी और ट्रस्ट-स्वामित्व वाली संरचना से तय होता है। यदि कंपनी को पब्लिक लिस्टिंग के लिए मजबूर किया गया, तो मैनेजमेंट का फोकस तिमाही मुनाफे और शॉर्ट-टर्म मार्केट परफॉर्मेंस पर केंद्रित हो जाएगा, जिससे दशकों पुरानी परोपकारी परंपरा पर असर पड़ सकता है।

रेगुलेटरी रुख

RBI का मुख्य उद्देश्य बड़ी और सिस्टमिक रूप से महत्वपूर्ण कंपनियों में पारदर्शिता लाना है। हालांकि, टाटा संस फिलहाल इस नियम से बचने के लिए कई विकल्प तलाश रही है, जिसमें सब्सिडियरी कंपनियों का पुनर्गठन (Restructuring) भी शामिल है। यह मामला देश की दिग्गज कॉर्पोरेट विरासत और आधुनिक वित्तीय नियमों के बीच एक बड़े टकराव के रूप में देखा जा रहा है। अब निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या सरकार या केंद्रीय बैंक इसमें कोई लचीलापन दिखाते हैं या फिर टाटा ग्रुप को कोई बड़ा बदलाव करना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.