PFRDA का बड़ा फैसला: अब NPS का पैसा लगेगा प्राइवेट एसेट्स में, जानें क्या हैं नियम

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AuthorMehul Desai|Published at:
PFRDA का बड़ा फैसला: अब NPS का पैसा लगेगा प्राइवेट एसेट्स में, जानें क्या हैं नियम

रिटायरमेंट फंड रेगुलेटर PFRDA ने अब नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) फंड्स को अपनी कुल संपत्ति का **1%** हिस्सा कैटेगरी-I और II के अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में निवेश करने की मंजूरी दे दी है।

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) के इस फैसले के साथ ही भारत में रिटायरमेंट सेविंग्स को निवेश करने का तरीका बदल रहा है। अब तक NPS का पैसा मुख्य रूप से सरकारी बॉन्ड्स में सुरक्षित रहता था, लेकिन अब यह संस्थागत पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट क्रेडिट जैसे बाजारों की ओर भी रुख करेगा।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

जनता के पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेगुलेटर ने सख्त शर्तें लागू की हैं। किसी भी AIF में निवेश तभी संभव होगा जब उसका कॉरपस (Corpus) कम से कम ₹100 करोड़ हो और उसे कम से कम 'AA' क्रेडिट रेटिंग मिली हो। इसके अलावा, कोई भी पेंशन फंड अपनी कुल AIF लिमिट का 10% से ज्यादा पैसा एक सिंगल फंड में नहीं लगा सकता।

ऑपरेशन्ल चुनौतियां और नियम

पेंशन फंड्स के लिए मुख्य चुनौती हर दिन का नेट एसेट वैल्यू (NAV) रिपोर्ट करना है। चूंकि प्राइवेट एसेट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स लिक्विड नहीं होते, इसलिए उनकी रोज की वैल्युएशन करना एक जटिल काम है। साथ ही, PFRDA एक्ट की सेक्शन 25 के तहत विदेशी निवेश की मनाही है। इसे सुनिश्चित करने के लिए फंड मैनेजर्स को 'एक्सक्लूजन क्लॉज' (Exclusion Clauses) का इस्तेमाल करना होगा ताकि गलती से भी पैसा विदेश न जाए।

भारत में कुल पेंशन एसेट्स का आंकड़ा ₹45 लाख करोड़ के पार निकल चुका है, ऐसे में 1% का यह छोटा सा बदलाव भी करोड़ों की पूंजी के लिए नए रास्ते खोल सकता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि फंड मैनेजर्स इन कॉम्प्लेक्स एसेट्स को कैसे हैंडल करते हैं और क्या वे रोजाना की लिक्विडिटी जरूरतों को बनाए रखते हुए बेहतर रिटर्न दे पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.