NRI Property Deals: 1 अक्टूबर से बदल रहे हैं TDS के नियम, खरीदारों को बरतनी होगी सावधानी

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AuthorAditya Rao|Published at:
NRI Property Deals: 1 अक्टूबर से बदल रहे हैं TDS के नियम, खरीदारों को बरतनी होगी सावधानी

1 अक्टूबर, 2026 से NRI से प्रॉपर्टी खरीदने वाले रेजिडेंट्स के लिए नियम सख्त हो गए हैं। अब खरीदारों को नए 'फॉर्म 141' का इस्तेमाल करना होगा, जिसमें सेलर की फॉरेन टैक्स ID जैसी जानकारी देना अनिवार्य है।

क्या बदला है?

Central Board of Direct Taxes (CBDT) ने NRI सेलर्स से प्रॉपर्टी खरीदने वाले रेजिडेंट्स के लिए TDS नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। 1 अक्टूबर, 2026 से रेजिडेंट इंडिविजुअल्स और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिलीज (HUF) के लिए अपडेटेड फॉर्म 141 भरना अनिवार्य होगा। यह फॉर्म अब एक यूनिफाइड चालान-कम-स्टेटमेंट के रूप में काम करेगा। इसके साथ ही, इनकम-टैक्स एक्ट के सेक्शन 393(2) के तहत टैक्स कटौती को ट्रैक करने के लिए एक नई 'शेड्यूल E' जोड़ी गई है।

सेलर की डिटेल्स देना क्यों जरूरी?

नए नियमों के तहत पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, खरीदार को सेलर से जुड़ी हर छोटी जानकारी जुटानी होगी। इसमें सेलर का:

  • Tax Residency Certificate (TRC) नंबर
  • विदेशी Tax Identification Number (TIN)
  • विदेश का कन्फर्म कॉन्टैक्ट एड्रेस

यह जानकारी तब भी देनी होगी, अगर सेलर के पास पहले से भारत का PAN कार्ड मौजूद है। इसका उद्देश्य टैक्स विथहोल्डिंग में होने वाली गलतियों को रोकना है।

खरीदारों पर रिस्क और जिम्मेदारी

इन नियमों के बाद खरीदारों की जवाबदेही बढ़ गई है। नए फॉर्म 141 में प्रॉपर्टी का पता, स्टैंप ड्यूटी वैल्यूएशन और पेमेंट शेड्यूल जैसी विस्तृत जानकारी देनी होगी। अगर एक से ज्यादा खरीदार हैं, तो हर व्यक्ति को अलग से फॉर्म फाइल करना होगा।

सावधानी: गलत रिपोर्टिंग या विदेशी टैक्स डॉक्यूमेंट्स न जुटा पाने के कारण आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस मिल सकता है। चूंकि NRI डील्स बड़ी वैल्यू की होती हैं, इसलिए किसी भी एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले अपने लीगल और टैक्स कंसल्टेंट से इन नए नियमों के तहत ड्यू डिलिजेंस जरूर करवाएं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.