July 1 से शुरू हो रही है नई विदेशी संपत्ति घोषणा योजना (FAST-DS)!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
July 1 से शुरू हो रही है नई विदेशी संपत्ति घोषणा योजना (FAST-DS)!

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भारतीय सरकार 1 जुलाई 2026 से 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम' (FAST-DS) लेकर आ रही है। यह छह महीने की विंडो टैक्सपेयर्स को अपनी विदेशी संपत्ति और आय की स्वैच्छिक घोषणा करने का मौका देगी, साथ ही 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत अभियोजन से सुरक्षा भी मिलेगी।

क्या है यह नई स्कीम?

भारतीय सरकार ने 1 जुलाई 2026 से 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम' (FAST-DS) शुरू करने का ऐलान किया है। यह स्कीम टैक्सपेयर्स को एक खास मौका देगी, जिसके तहत वे पिछले टैक्स फाइलिंग में छूट गई अपनी विदेशी संपत्ति और आय का खुलासा कर सकेंगे। इसका मुख्य मकसद है कि लोग अपनी गलतियों को सुधार सकें और 'ब्लैक मनी (अनडिस्क्लोज्ड फॉरेन इनकम एंड एसेट्स) एंड इंपोजिशन ऑफ टैक्स एक्ट, 2015' के तहत कड़ी सजा और भारी जुर्माने से बच सकें।

यह टैक्सपेयर्स के लिए क्यों जरूरी है?

यह स्कीम खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिन्हें विदेशी संपत्ति (Foreign Assets) की जानकारी को अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के शेड्यूल FA में भरने में दिक्कत आती है। टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले प्रोफेशनल्स, जिन्हें विदेशी कंपनियों से ESOPs या RSUs मिलते हैं, या वो नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) जो भारत लौट आए हैं लेकिन उनके विदेशी बैंक अकाउंट या निवेश अभी भी हैं, उनके लिए यह स्कीम राहत भरी हो सकती है।

अगर इन संपत्तियों का खुलासा नहीं किया जाता है, तो यह जांच का विषय बन सकता है। 'ब्लैक मनी एक्ट' टैक्स चोरी को रोकने के लिए बनाया गया है, जिसमें भारी जुर्माने के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई का भी प्रावधान है। FAST-DS स्कीम ऐसे लोगों को कानून की पूरी सख्ती से बचे बिना, एक व्यवस्थित (हालांकि महंगी) तरीके से अपनी भूल को सुधारने का अवसर प्रदान करती है।

घोषणा के लिए दो कैटेगरी

इस स्कीम में दो कैटेगरी बनाई गई हैं, हर एक की अपनी फीस और नियम हैं:

कैटेगरी 1: यह उन लोगों के लिए है जिनकी विदेशी संपत्ति और आय ₹1 करोड़ तक है। ऐसे लोग अपनी संपत्ति के उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value) पर 60% का टैक्स देकर घोषणा कर सकते हैं। यह एक बड़ी रकम है, इसलिए लोगों को सोचना होगा कि क्या यह भुगतान उन्हें मिलने वाली सुरक्षा के लायक है।

कैटेगरी 2: यह उन मामलों के लिए है जहां विदेशी आय पर भारत में टैक्स तो चुका दिया गया है, लेकिन उस विदेशी संपत्ति का खुद का खुलासा नहीं किया गया था। ₹5 करोड़ तक की संपत्ति के लिए, इस कैटेगरी में केवल ₹1 लाख का एकमुश्त (Flat) शुल्क देना होगा। यह उन लोगों के लिए है जिन्होंने अपना टैक्स तो सही चुकाया है, बस संपत्ति की जानकारी देना भूल गए थे।

जोखिम को समझना

इस स्कीम में शामिल होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत कानूनी कार्रवाई से छूट मिल जाएगी। इसके बिना, विदेशी संपत्ति की रिपोर्टिंग में अनजाने में हुई गलतियों पर भारी जुर्माना लग सकता है, जो अक्सर इस स्कीम के तहत लगने वाले टैक्स से कहीं ज्यादा होता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक स्वैच्छिक (Voluntary) अनुपालन का अवसर है, न कि कोई सामान्य टैक्स माफी। सरकार उम्मीद करती है कि जो संपत्ति नियमित की जा रही है, उसका पूरा खुलासा किया जाएगा।

निवेशकों और प्रोफेशनल्स के लिए खास बातें

जिन टैक्सपेयर्स को लगता है कि उनसे विदेशी संपत्ति की घोषणा में कोई चूक हुई है, उन्हें 1 जुलाई 2026 की तारीख से पहले तैयारी शुरू कर देनी चाहिए:

  1. सभी दस्तावेज इकट्ठा करें: अपने बैंक स्टेटमेंट, निवेश खातों का विवरण, और विदेशी RSU या ESOP ग्रांट्स के रिकॉर्ड जैसे सभी जरूरी कागजात जुटा लें। सही घोषणा के लिए स्पष्ट और सत्यापन योग्य डेटा का होना बहुत जरूरी है।
  2. विशेषज्ञ की सलाह लें: किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या अंतरराष्ट्रीय कराधान (International Taxation) में विशेषज्ञता रखने वाले टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें। भारतीय टैक्स कानूनों और विदेशी संपत्तियों से जुड़े नियमों की पेचीदगियों को समझने के लिए पेशेवर सलाह बहुत मददगार साबित हो सकती है, ताकि यह तय हो सके कि आपकी स्थिति कैटेगरी 1 में आती है या कैटेगरी 2 में।
  3. सरकारी घोषणाओं पर नजर रखें: इनकम-टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से आने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें। सरकार से उम्मीद है कि वे घोषणा जमा करने के तरीके, फॉर्म और गाइडलाइन्स जारी करेगी। जब यह विंडो खुलेगी, तो एक सुचारू और सही प्रक्रिया के लिए इन तकनीकी बातों को समझना महत्वपूर्ण होगा।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.