UPI Fee Rules: आम यूजर्स को बड़ी राहत, NPCI ने साफ की स्थिति

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AuthorAditya Rao|Published at:
UPI Fee Rules: आम यूजर्स को बड़ी राहत, NPCI ने साफ की स्थिति

NPCI ने स्पष्ट कर दिया है कि रिटेल UPI ट्रांजेक्शन पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेंगे। नया फीस स्ट्रक्चर केवल उन बड़ी कंपनियों पर लागू होगा जिनका एनुअल टर्नओवर **₹1,000 करोड़** से ज्यादा है, ताकि डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा सके।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI फीस को लेकर चल रही सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। NPCI के CEO दिलीप आसबे ने साफ किया है कि देश के 96% UPI ट्रांजेक्शन वॉल्यूम और 90% वैल्यू पर कोई भी एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा।

किन कंपनियों पर होगा असर?

नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क मुख्य रूप से उन बड़े कॉरपोरेट्स पर केंद्रित है जिनका सालाना टर्नओवर ₹1,000 करोड़ से अधिक है। मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए स्ट्रक्चर के जरिए होने वाली 80% वसूली इन्हीं बड़ी कंपनियों से आने की उम्मीद है। चूँकि ये कंपनियां पहले से ही क्रेडिट कार्ड पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर हैंडल करती हैं, इसलिए उम्मीद है कि वे इन चार्जेस को खुद वहन करेंगी और ग्राहकों पर बोझ नहीं डालेंगी।

डोमेस्टिक नेटवर्क और नए फंड को बढ़ावा

NPCI ने 15 सितंबर, 2026 से UPI पर क्रेडिट ट्रांजेक्शन के लिए RuPay कार्ड को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम भारतीय पेमेंट इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के मुकाबले मजबूत बनाने के लिए है। इसके अलावा, NPCI ने नई वसूली का 5% हिस्सा एक सपोर्ट फंड में डालने का फैसला किया है। इस पहल के जरिए अगले तीन सालों में ₹3,000 करोड़ का फंड जुटाया जाएगा, जिसका इस्तेमाल छोटे व्यापारियों और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में होगा।

निवेशकों के लिए संकेत

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस स्पष्टीकरण से डिजिटल पेमेंट सेक्टर में अनिश्चितता खत्म हुई है। आम जनता के लिए सर्विस फ्री रखकर NPCI ने UPI की बढ़ती लोकप्रियता को बरकरार रखा है, जबकि बड़ी कंपनियों से फीस वसूलकर पेमेंट सेक्टर की रेवेन्यू डायनामिक्स को भी सुधारा जा रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.