सितंबर के बाद से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) **$50 बिलियन** घट गया है। इसी को देखते हुए RBI ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर इसे **5.50%** कर दिया है।
रिजर्व में बड़ी गिरावट
2 अक्टूबर, 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर $734.6 बिलियन पर आ गया है। गौर करने वाली बात यह है कि 4 सितंबर को यह $785.71 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर था, यानी महज कुछ हफ्तों में $50.11 बिलियन की कमी आई है। यह गिरावट रुपये को संभालने के लिए RBI द्वारा की गई लगातार कोशिशों का नतीजा है।
क्यों बदला RBI का रुख?
महंगाई पर लगाम लगाने और रुपये में आ रही अस्थिरता को रोकने के लिए RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। केंद्रीय बैंक अब 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) की नीति पर चल रहा है, ताकि बाजार से महंगाई का दबाव कम किया जा सके। फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले 96.50–96.60 के दायरे में संघर्ष कर रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US ट्रेजरी यील्ड में उछाल है।
बाजार पर असर
ब्याज दरों में इस बढ़ोतरी से कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दिख सकता है। खासकर उन कंपनियों के लिए जो भारी कर्ज में डूबी हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल से अक्टूबर के बीच विदेशी निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से $10.3 बिलियन की निकासी की है। हालांकि, RBI का कहना है कि वर्तमान रिजर्व अभी भी सुरक्षित है, जो देश के लगभग 11 महीने के आयात (Imports) को कवर करने के लिए पर्याप्त है।
आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों की अर्निंग्स रिपोर्ट्स और ग्लोबल ऑयल कीमतों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि यही फैक्टर आगे चलकर रुपये की चाल और बाजार की दिशा तय करेंगे।
