ओवरसीज डिपॉजिट विंडो में भारी निवेश के चलते भारत का फॉरेक्स रिजर्व **$729.3 बिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इस बेतहाशा लिक्विडिटी के बाद RBI ने अब इस स्पेशल फैसिलिटी को समय से पहले बंद करने का फैसला लिया है।
भारत की विदेशी डिपॉजिट स्कीम को उम्मीद से कहीं ज्यादा सफलता मिली है। NRI निवेशकों के भारी निवेश ने देश के फॉरेक्स रिजर्व में नई जान फूंक दी है। 21 अगस्त 2026 तक फॉरेक्स रिजर्व $729.3 बिलियन के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (All-time high) पर पहुंच गया है।
RBI का कड़ा कदम
फंड्स के तेजी से बढ़ते अंबार को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस स्पेशल स्वैप विंडो को 31 अगस्त 2026 को ही बंद करने का फैसला लिया है। पहले इसकी डेडलाइन 30 सितंबर तय थी। हालांकि, 11 सितंबर तक अनुबंधित डिपॉजिट्स के लिए बैंकों को स्वैप सुविधा का लाभ लेने की अनुमति दी गई है। यह कदम बताता है कि केंद्रीय बैंक अब लिक्विडिटी के फ्लो को सीमित करने के मूड में है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फॉरेक्स बफर RBI को करेंसी मार्केट में इंटरवेंशन की बड़ी ताकत देता है। कच्चे तेल (Crude Oil) की ऊंची कीमतों के कारण रुपए पर जो दबाव बना हुआ है, उसे संभालने में यह रिजर्व एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
रिस्क फैक्टर और चिंताएं
हालांकि, सिक्का का दूसरा पहलू यह है कि यह निवेश मुख्य रूप से शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी है। जुलाई 2026 तक RBI की नेट शॉर्ट पोजीशन $136.8 बिलियन तक पहुंच गई है, जो भविष्य में डॉलर बेचने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि RBI इन डेरिवेटिव ऑब्लिगेशंस को बिना किसी मार्केट वोलेटिलिटी के कैसे अनवाइंड (Unwind) करेगा। यदि ग्लोबल कंडीशंस बदलती हैं, तो अचानक फंड्स की निकासी एक चुनौती बन सकती है।
