ग्लोबल मार्केट से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच Indian Rupee में स्थिरता लौटी है और यह **96** प्रति डॉलर के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है। क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने करेंसी को सहारा दिया है।
बाजार को मिली राहत
बुधवार के कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया राहत की सांस ले रहा है। पिछले कुछ दिनों में यह दो महीने के निचले स्तर 96.14 तक फिसल गया था, लेकिन अब यह 95.94 से 95.99 की रेंज में कारोबार कर रहा है।
क्यों आया यह बदलाव?
इस स्थिरता के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख में आया बदलाव है। अगले महीने US में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना अब घटकर 44% रह गई है, जो कुछ हफ्ते पहले 70% के करीब थी। इसके अलावा, अमेरिका में कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का 12 साल के निचले स्तर पर आना भी मार्केट सेंटीमेंट के लिए बड़ा ट्रिगर रहा।
क्रूड ऑयल का असर
भारत के लिए राहत की बात यह है कि ग्लोबल लेवल पर क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 2.5% की गिरावट आई है। क्रूड सस्ता होने से भारत का इम्पोर्ट बिल घटेगा, जिससे करंट अकाउंट पर दबाव कम होगा। वहीं, Reserve Bank of India लगातार अपने फॉरेक्स रिजर्व के जरिए रुपए में आने वाली अस्थिरता पर नजर बनाए हुए है ताकि अनावश्यक सट्टेबाजी को रोका जा सके।
निवेशकों के लिए चेतावनी
रुपए की यह मजबूती फिलहाल राहत भरी है, लेकिन निवेशकों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है। आगे चलकर क्रूड ऑयल के दाम, US ट्रेजरी यील्ड्स और विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) में होने वाला बदलाव रुपए की चाल तय करेंगे।
