क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भारतीय रुपये पर भारी दबाव है। रुपया फिसलकर **96** के स्तर के करीब पहुंच गया है, जिससे विदेशी निवेशकों की निकासी तेज हो गई है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गए हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर देश के इंपोर्ट बिल को बढ़ा रही हैं। डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये में कमजोरी बनी हुई है, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
अमेरिकी यील्ड और विदेशी निवेशकों का पलायन
वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी भी भारतीय बाजार के लिए सिरदर्द बनी हुई है। अमेरिका में 5% के पार निकली 5-साल की यील्ड ने ग्लोबल निवेशकों को भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बाजार की ओर रुख करने पर मजबूर किया है। इस महीने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट से करीब $3.5 बिलियन की पूंजी बाहर निकाली है।
RBI का रुख
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रखे हुए है। RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने स्पष्ट किया है कि रुपये में आई गिरावट का भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत फंडामेंटल्स से कोई लेना-देना नहीं है, यह केवल बाहरी कारकों का असर है। वोलेटिलिटी को थामने के लिए सेंट्रल बैंक लगातार करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप कर रहा है ताकि रुपये को 96 के अहम स्तर के नीचे जाने से रोका जा सके।
निवेशकों के लिए अब क्रूड ऑयल के भाव, विदेशी निवेश का डेटा और RBI की अगली चाल पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
