Indian Rupee: दो महीने के निचले स्तर पर रुपया, RBI की पॉलिसी मीटिंग पर टिकीं निवेशकों की नजरें

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Rupee: दो महीने के निचले स्तर पर रुपया, RBI की पॉलिसी मीटिंग पर टिकीं निवेशकों की नजरें

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर **96.43** के दो महीने के निचले स्तर पर आ गया है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और **7 अक्टूबर** को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति बैठक से पहले बाजार में घबराहट का माहौल है।

रुपये में क्यों आ रही है गिरावट?

भारतीय रुपये में कमजोरी का मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से भारतीय बाजारों में की जा रही भारी बिकवाली है। ग्लोबल मार्केट में बेहतर रिटर्न की तलाश में निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे घरेलू करेंसी पर दबाव बना हुआ है।

RBI की पॉलिसी पर फोकस

निवेशकों की नजरें पूरी तरह से 7 अक्टूबर, 2026 को खत्म होने वाली RBI की Monetary Policy Committee की बैठक पर टिकी हैं। अगस्त में रिटेल महंगाई 4.82% रही थी, जो कि RBI के 4% के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है। इसे काबू में करने के लिए जानकारों का मानना है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% तक ले जा सकता है।

सरकारी बैंकों ने फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में डॉलर की बिकवाली करके रुपये की गिरती चाल को थामने की कोशिश की है, ताकि बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव न हो।

क्या बढ़ेगा आपका बोझ?

अगर RBI रेट हाइक करता है, तो कंपनियों और आम लोगों के लिए लोन लेना महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और बैंकिंग सेक्टर पर दिखेगा, क्योंकि बढ़ती ब्याज दरों से मांग घटने और कर्ज की लागत (debt servicing cost) बढ़ने का डर है।

इसके अलावा, US Treasury Yields का बढ़ना और डॉलर इंडेक्स की मजबूती भी उभरते बाजारों की करेंसी के लिए चुनौती बनी हुई है। साथ ही, कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी भी भारत के ट्रेड बैलेंस पर दबाव बढ़ा रही है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि RBI के कमेंट्री में भविष्य की लिक्विडिटी और आगे के रुख को लेकर क्या संकेत मिलते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.