Reserve Bank of India (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर महीने में भारतीय कॉर्पोरेट्स द्वारा विदेशी ऑपरेशन्स में किया गया निवेश **37%** गिरकर **$4.34 बिलियन** पर आ गया है।
निवेश में गिरावट की असली वजह
Reserve Bank of India (RBI) की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में यह आंकड़ा $6.87 बिलियन था, जो सितंबर में घटकर $4.34 बिलियन रह गया है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण फाइनेंशियल गारंटी में आई भारी कमी है।
फाइनेंशियल गारंटी में 77% की गिरावट
कंपनियों द्वारा अपनी विदेशी ब्रांचों के लिए दी जाने वाली फाइनेंशियल गारंटी में 77% की बड़ी गिरावट देखी गई है, जो $528.21 मिलियन पर आ गई है। यह दर्शाता है कि कंपनियां मौजूदा आर्थिक माहौल में अपनी बैलेंस शीट पर जोखिम कम करने के लिए ज्यादा सतर्क रुख अपना रही हैं। वहीं, इक्विटी कमिटमेंट में भी 20% की गिरावट आई है और यह $3.27 बिलियन रहा।
लोन की ओर बढ़ता रुझान
भले ही कुल निवेश कम हुआ हो, लेकिन विदेशी सब्सिडियरीज को दिए जाने वाले लोन में 16% का इजाफा हुआ है, जो बढ़कर $549.16 मिलियन तक पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां अब गारंटी-बेस्ड डेट के बजाय सीधे लोन देने की रणनीति को प्राथमिकता दे रही हैं।
निवेश का केंद्र
भौगोलिक दृष्टि से नीदरलैंड्स भारतीय पूंजी के लिए सबसे पसंदीदा जगह बनी हुई है, जहाँ सितंबर में $2.16 बिलियन का निवेश हुआ। इसके बाद सिंगापुर का नंबर आता है, जिसने $644.23 मिलियन आकर्षित किए। इन दोनों देशों ने मिलकर कुल आउटवर्ड निवेश का 65% हिस्सा अपने नाम किया है।
अप्रैल से अगस्त के बीच $13.8 बिलियन के मजबूत FDI इनफ्लो के बीच, कॉर्पोरेट के इस बदलते वित्तीय व्यवहार पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
