अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में क्रेडिट ग्रोथ का ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है। अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड का चलन धीमा हुआ है, जबकि गोल्ड-लोन मार्केट सालाना **83.2%** की रफ्तार से बढ़कर **₹5.6 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है।
अगस्त 2026 तक भारतीय क्रेडिट बाजार में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि कुल बैंक क्रेडिट 19.1% की सालाना दर से बढ़कर ₹223.9 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, लेकिन अब ग्राहक बिना किसी गारंटी वाले लोन (Unsecured Loan) के बजाय संपत्ति गिरवी रखकर लोन लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पर्सनल लोन में सुस्ती
आंकड़े बताते हैं कि लोगों का रुझान महंगे अनसिक्योर्ड लोन से कम हो रहा है। अगस्त में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन में सिर्फ 2.4% और क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग में मात्र 3.6% की ग्रोथ देखी गई। यह साफ संकेत है कि रिटेल कर्जदार अब ऊंची ब्याज दरों वाले लोन से परहेज कर रहे हैं।
गोल्ड लोन का दबदबा
दूसरी ओर, गोल्ड लोन का बाजार तेजी से फैल रहा है। चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले 5 महीनों में गोल्ड-बैक्ड लोन में ₹98,096 करोड़ का इजाफा हुआ, जो लगभग होम लोन की ग्रोथ (₹98,858 करोड़) के बराबर है।
क्या है रिस्क?
निवेशकों के लिए चेतावनी की बात यह है कि इस 'सुरक्षित' माने जाने वाले सेगमेंट में डिफॉल्ट बढ़ रहे हैं। गोल्ड लोन में डेलिंक्वेंसी (Delinquency) दर मार्च 2026 के 0.7% से बढ़कर अगस्त 2026 में 2.6% पर पहुंच गई है। यदि सोने की कीमतों में गिरावट आती है, तो लेंडर्स के लिए LTV (Loan-to-Value) रेश्यो बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, एक ही सोने को कई जगहों पर गिरवी रखने जैसी ओवर-लीवरेजिंग की समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
बाजार के जानकारों का मानना है कि अब निवेशकों को उन लेंडर्स पर नजर रखनी होगी जो अपनी क्रेडिट स्टैंडर्ड्स को बरकरार रखते हुए सावधानी से गोल्ड लोन पोर्टफोलियो बढ़ा रहे हैं।
