22 अक्टूबर 2026 को भारतीय बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस में **99%** की भारी गिरावट देखी गई। GST भुगतान और स्टेट बॉन्ड नीलामी के चलते यह सरप्लस घटकर महज **₹542 करोड़** रह गया है, जिससे इंटरबैंक लेंडिंग रेट्स में तनाव बढ़ गया है।
भारतीय बैंकिंग सिस्टम में 22 अक्टूबर 2026 को नकदी की भारी किल्लत महसूस की गई, जहां सिस्टम में उपलब्ध सरप्लस फंड घटकर सिर्फ ₹541.95 करोड़ रह गया। गौर करने वाली बात यह है कि एक दिन पहले ही यह आंकड़ा ₹48,303.95 करोड़ था। जून के अंत के बाद पहली बार बैंकिंग सिस्टम में इतनी कम लिक्विडिटी देखी गई है।
नकदी घटने के पीछे की मुख्य वजहें
इस संकट की मुख्य वजह कई बड़े आउटफ्लो का एक साथ होना है:
- GST पेमेंट: अनुमान है कि बाजार से ₹1.5 लाख करोड़ से ₹2 लाख करोड़ के बीच की राशि GST के रूप में निकली है।
- बॉन्ड नीलामी: राज्य सरकारों द्वारा ₹23,000 करोड़ के बॉन्ड जारी किए गए।
- RBI का हस्तक्षेप: रुपया को सहारा देने के लिए RBI फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में सक्रिय रही, जिससे सिस्टम से लिक्विडिटी कम हुई।
मार्केट पर असर
कैश की इस तंगी का असर मनी मार्केट पर साफ दिख रहा है। ओवरनाइट लेंडिंग रेट्स 5.70% से 5.80% के दायरे में पहुंच गए हैं, जो RBI की Marginal Standing Facility (MSF) दर 5.75% के बेहद करीब है। यह संकेत है कि बैंकों को अब अपनी शॉर्ट-टर्म जरूरतों को पूरा करने के लिए महंगा कर्ज लेना पड़ रहा है।
RBI ने संभाली कमान
स्थिति को देखते हुए RBI ने Variable Rate Repo नीलामी आयोजित की। बैंकों की तरफ से ₹1.62 लाख करोड़ की मांग आई, जो RBI द्वारा जारी किए गए ₹50,000 करोड़ के नोटिफाइड अमाउंट से कहीं ज्यादा थी। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकारी खर्च कब शुरू होता है, जिससे सिस्टम में वापस पैसा आएगा और रेट्स सामान्य हो सकेंगे।
