India Wholesale Inflation: महंगाई का बड़ा झटका, सितंबर में 11.4% पर पहुंची होलसेल इंफ्लेशन

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Wholesale Inflation: महंगाई का बड़ा झटका, सितंबर में 11.4% पर पहुंची होलसेल इंफ्लेशन

सितंबर महीने में देश की होलसेल महंगाई दर (WPI) बढ़कर **11.4%** पर पहुंच गई है, जो अगस्त में **9.9%** थी। ईंधन और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से आम जनता के साथ-साथ अब RBI पर भी ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।

महंगाई क्यों बढ़ी?

होलसेल महंगाई में यह उछाल सप्लाई चेन में बनी दिक्कतों को दर्शाता है। ईंधन, बिजली और खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी इसका मुख्य कारण है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की अस्थिर कीमतें और घरेलू स्तर पर बारिश के अनिश्चित पैटर्न के चलते कृषि उत्पादन में आई कमी ने इस आग में घी का काम किया है।

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी पर असर

भले ही Reserve Bank of India मुख्य रूप से रिटेल इंफ्लेशन के आधार पर पॉलिसी तय करता है, लेकिन होलसेल महंगाई का बढ़ना अंततः रिटेल बाजार तक पहुंचता है। वर्तमान में रिटेल इंफ्लेशन 5.5% पर है, जो कि केंद्रीय बैंक की 6% की टॉलरेंस लिमिट के बेहद करीब है। पिछले हफ्ते ही हुई बढ़ोतरी के बावजूद, अब मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) पर महंगाई को थामने के लिए और भी सख्त कदम उठाने का दबाव है।

निवेशकों के लिए चेतावनी

महंगाई का यह ट्रेंड और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका शेयर बाजार के लिए चिंताजनक है। इसका सीधा असर कंपनियों की कॉस्ट ऑफ डेट पर पड़ेगा, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर, जहां कर्ज का बोझ ज्यादा होता है, वहां डिमांड कम होने का जोखिम बना हुआ है। अब बाजार की नजरें आगे आने वाले इकोनॉमिक डेटा और RBI की अगली मीटिंग पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि क्या ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.