भारत का सर्विस एक्सपोर्ट सितंबर में **$39.3 बिलियन** रहा, जबकि इंपोर्ट का आंकड़ा **$20.1 बिलियन** दर्ज किया गया। देश को **$19.2 बिलियन** का ट्रेड सरप्लस मिला है, लेकिन एक्सपोर्ट ग्रोथ में आती सुस्ती निवेशकों के लिए एक बड़ा अलर्ट है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने में सर्विस सेक्टर का एक्सपोर्ट $39.3 बिलियन दर्ज किया गया है। हालांकि यह आंकड़ा काफी मजबूत है, लेकिन साल-दर-साल (YoY) आधार पर ग्रोथ रेट घटकर 7.2% रह गई है। अगर पिछले कुछ महीनों—जुलाई और अगस्त—की बात करें, तो ग्रोथ रेट 13% से ऊपर थी, जो अब धीमी होती दिख रही है।
इंपोर्ट में भी बढ़ोतरी
सितंबर में सर्विस इंपोर्ट 12.6% बढ़कर $20.1 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है। अच्छी बात यह है कि निर्यात (Exports) का आंकड़ा ज्यादा होने के कारण देश को $19.2 बिलियन का स्वस्थ ट्रेड सरप्लस मिला है। यह सरप्लस भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच है, क्योंकि यह मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (माल व्यापार घाटा) की भरपाई करता है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
भारतीय सर्विस सेक्टर में IT और कंसल्टेंसी फर्मों का दबदबा है। एक्सपोर्ट ग्रोथ में नरमी इस बात का संकेत हो सकती है कि वैश्विक कंपनियां अपने बजट में कटौती कर रही हैं। यदि ग्लोबल मार्केट में मांग घटती है, तो इसका सीधा असर भारत की बड़ी IT कंपनियों के रेवेन्यू पर पड़ सकता है।
इकोनॉमी पर असर
दूसरी तरफ, यह सरप्लस भारत के 'बैलेंस ऑफ पेमेंट्स' और 'रुपये' की स्थिरता के लिए जरूरी है। यह करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) के दबाव को कम करता है। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या यह सुस्ती केवल एक महीने का झटका है या लंबी मंदी की शुरुआत। निवेशकों को अमेरिका और यूरोप के आर्थिक रुझानों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि यही भारतीय सेवाओं के सबसे बड़े खरीदार हैं।
