जुलाई 2026 में भारत का सर्विस एक्सपोर्ट **13.4%** बढ़कर **$38.25 अरब** पहुंच गया है। हालांकि, सर्विस इंपोर्ट में **19.1%** की तेज बढ़ोतरी ने ट्रेड सरप्लस को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में देश का सर्विस एक्सपोर्ट सालाना आधार पर 13.4% की बढ़त के साथ $38.25 अरब के स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन इस चमक के बीच इंपोर्ट का डेटा गौर करने लायक है। इसी अवधि में सर्विस इंपोर्ट 19.1% उछलकर $20.61 अरब दर्ज किया गया है।
ट्रेड सरप्लस का गणित
इंपोर्ट की तेज रफ्तार के बावजूद, भारत ने जुलाई महीने में करीब $17.65 अरब का सर्विस ट्रेड सरप्लस बरकरार रखा है। हालांकि, मंथ-ऑन-मंथ ट्रेंड देखें तो एक्सपोर्ट में 5.2% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इंपोर्ट 11.5% बढ़ा है। यह साफ दिखाता है कि क्रॉस-बॉर्डर सर्विस इनपुट्स पर भारत की निर्भरता तेजी से बढ़ रही है।
अप्रैल-जुलाई का ओवरऑल हाल
चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले चार महीनों (अप्रैल से जुलाई) की बात करें, तो कुल सर्विस एक्सपोर्ट $145 अरब रहा है, जिसके मुकाबले इंपोर्ट $75.14 अरब रहा। RBI ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े प्रोविजनल हैं और भविष्य में बैलेंस-ऑफ-पेमेंट डेटा के आधार पर इनमें बदलाव हो सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सर्विस सेक्टर भारत के लिए विदेशी मुद्रा का मुख्य जरिया बना हुआ है, लेकिन इंपोर्ट का एक्सपोर्ट से तेज बढ़ना ट्रेड डेफिसिट के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ग्लोबल डिमांड में अस्थिरता और इनपुट कॉस्ट बढ़ने से आने वाले समय में ट्रेड बैलेंस को स्थिर रखना एक बड़ी परीक्षा होगी।
