भारत ने अपने फॉरेक्स रिजर्व के रिकॉर्ड **$740.8 बिलियन** तक पहुँचने के बाद US सरकारी प्रतिभूतियों (US Government Securities) में निवेश बढ़ाकर **$219.71 बिलियन** कर दिया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त 2026 तक अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज में अपनी होल्डिंग्स को बढ़ाकर $219.71 बिलियन कर दिया है। यह कदम देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी के बाद आया है, जो अगस्त के अंत में रिकॉर्ड $740.8 बिलियन के स्तर को छू गया था। इस भारी-भरकम डॉलर इनफ्लो को मैनेज करने के लिए केंद्रीय बैंक अब अमेरिकी सरकारी डेट (Debt) का सहारा ले रहा है।\n\n### RBI की रणनीति के पीछे की वजह\n\nइस निवेश के पीछे मुख्य मकसद डॉलर की अतिरिक्त लिक्विडिटी को मैनेज करना है। हालिया स्पेशल स्वैप फैसिलिटी और FCNR डिपॉजिट्स के जरिए देश में काफी पूंजी आई है। इस पूंजी को बेकार बैठने के बजाय, RBI इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित और लिक्विड एसेट यानी US ट्रेजरी में निवेश कर रहा है, जिससे भारत को ब्याज भी मिलता रहे और फंड की सुरक्षा भी बनी रहे।\n\n### लॉन्ग-टर्म डेट पर दांव\n\nRBI का पोर्टफोलियो मैनेजमेंट बताता है कि उनका झुकाव लॉन्ग-टर्म डेट की ओर है। कुल होल्डिंग्स में से लगभग $198.52 बिलियन लॉन्ग-टर्म सिक्योरिटीज में पार्क किए गए हैं। इससे बैंक अमेरिकी ब्याज दरों के मौजूदा माहौल का फायदा उठाते हुए बेहतर यील्ड (Yield) लॉक करने की कोशिश कर रहा है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है संकेत?\n\nभारतीय निवेशकों के लिए यह एक सकारात्मक खबर है क्योंकि मजबूत फॉरेक्स रिजर्व ग्लोबल उतार-चढ़ाव के समय भारतीय रुपये की वैल्यू को सपोर्ट करता है। हालांकि, इसमें जोखिम भी शामिल है। अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव आने पर इन होल्डिंग्स की मार्केट वैल्यू प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि RBI सिर्फ अमेरिका पर निर्भर न रहकर अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड जैसे अन्य एसेट्स को भी शामिल रखता है, ताकि रिस्क को बेहतर तरीके से बैलेंस किया जा सके।
