भारत में क्रिप्टो के जरिए टैक्स बचाने का एक नया तरीका सामने आया है। निवेशक अब ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर क्रिप्टोकरेंसी को गिफ्ट कार्ड्स में बदल रहे हैं, जिससे **30%** कैपिटल गेन्स टैक्स और **1%** टीडीएस (TDS) से बचा जा सके। वित्त मंत्रालय ने इस अवैध रूट पर जांच शुरू कर दी है।
टैक्स चोरी का नया खेल
भारत में क्रिप्टो निवेशक अब एक नए 'शैडो पेमेंट' तरीके का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके तहत USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी को स्वीडन, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देशों के प्लेटफॉर्म्स पर भेजकर भारतीय गिफ्ट वाउचर्स खरीदे जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में 7% से 8% का कन्वर्जन चार्ज लगता है, लेकिन बदले में निवेशक टैक्स के दायरे से पूरी तरह बाहर हो जाते हैं। इन वाउचर्स का इस्तेमाल राशन, ईंधन, सोना खरीदने और मोबाइल रिचार्ज जैसे रोजमर्रा के खर्चों के लिए किया जा रहा है।
क्यों है यह खतरनाक?
यह तरीका भले ही टैक्स बचाने का शॉर्टकट लग रहा हो, लेकिन इसके गंभीर जोखिम हैं:
- कानूनी सुरक्षा का अभाव: चूंकि यह सिस्टम भारतीय बैंकिंग फ्रेमवर्क से बाहर है, इसलिए किसी भी फ्रॉड या प्लेटफॉर्म के बंद होने पर निवेशकों का पैसा डूबना तय है।
- आईटी विभाग की रडार: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास डेटा-मैचिंग की ताकत है। अगर आप इन चैनल्स के जरिए सोना या लग्जरी सामान खरीदते हैं, तो ऑडिट नोटिस आने का खतरा बना रहता है।
सरकार की कार्रवाई
वित्त मंत्रालय और गृह मंत्रालय इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। चिंता का मुख्य विषय 'एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग' (Anti-Money Laundering) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) का उल्लंघन है। सरकार अब यह तय करने में जुटी है कि इन 'क्लोज्ड-लूप' वाउचर्स को किस तरह रेग्युलेट किया जाए। आने वाले समय में इन ऑफशोर प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी और क्रिप्टो खर्चों पर सख्त स्क्रूटनी की संभावना बनी हुई है।
