Reserve Bank of India के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त **2026** में LRS के जरिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे में **6%** की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
RBI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीयों ने Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत कुल $2.7 अरब की राशि विदेश भेजी है। यह आंकड़ा जुलाई के मुकाबले 6% अधिक है।
ट्रैवल और एजुकेशन का दबदबा
इस कुल आउटफ्लो में सबसे बड़ा हिस्सा ट्रैवल और एजुकेशन का है। ट्रैवल पर खर्च $1.6 अरब रहा, जो कुल राशि का करीब 60% है। खास बात यह है कि बिजनेस ट्रैवल में 365% का तूफानी उछाल आया है, जो $51 मिलियन तक पहुंच गया है। वहीं, लेजर ट्रैवल और क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले फॉरेन पेमेंट्स में 7.4% की गिरावट देखी गई।
शिक्षा पर खर्च भी 28.5% बढ़कर $855.5 मिलियन हो गया है। रिमोट और डिस्टेंस लर्निंग के लिए किए गए पेमेंट्स में भी 30% की मंथ-ऑन-मंथ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस सेक्टर में फिर से बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाता है।
विदेशी निवेश में सुस्ती
एक तरफ जहां खर्च बढ़ा है, वहीं विदेशी इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश 6.7% घट गया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स इसे केवल एक अस्थायी बदलाव मान रहे हैं, क्योंकि अगस्त 2025 की तुलना में यह निवेश अभी भी दोगुना है।
निवेशकों के लिए संकेत
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि LRS के तहत बढ़ते आउटफ्लो भारतीय रुपये पर दबाव बना सकते हैं। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी होगी कि क्या विदेशी निवेश में यह सुस्ती सिर्फ एक महीने का सुधार है या यह लंबी अवधि का ट्रेंड बन रहा है।
