India Inflation: महंगाई का 23 महीने का रिकॉर्ड टूटा, अब निवेशकों की बढ़ सकती है टेंशन!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Inflation: महंगाई का 23 महीने का रिकॉर्ड टूटा, अब निवेशकों की बढ़ सकती है टेंशन!

भारत में महंगाई दर सितंबर में बढ़कर **5.54%** के स्तर पर पहुंच गई है, जो अगस्त के **4.82%** से कहीं ज्यादा है। खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतों में आई उछाल ने आम बजट के साथ-साथ कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भी दबाव बना दिया है।

महंगाई का करंट डेटा और कारण

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, हेडलाइन इन्फ्लेशन सितंबर में 5.54% दर्ज की गई है। यह पिछले 23 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से अनाज, दालें, खाद्य तेल और महंगे ईंधन का हाथ है।

कंपनियों के मार्जिन पर मार

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि FMCG जैसी कंपनियां, जो कच्चे माल के लिए कृषि उत्पादों पर निर्भर हैं, उन्हें लागत बढ़ने का सामना करना पड़ सकता है। यदि ये कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं, तो इनके नेट प्रॉफिट में कमी आना तय है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर पड़ रहा है।

इकोनॉमी की स्थिति और RBI का रुख

हालांकि देश की जीडीपी ग्रोथ 7.8% की रफ्तार से दौड़ रही है और विदेशी निवेश का प्रवाह बना हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें चिंता का सबब बनी हुई हैं। आरबीआई ने बताया कि फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच ताजा लोन पर ब्याज दरों में 93 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आई है। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या आरबीआई इस महंगाई को देखते हुए ब्याज दरों में आगे और कटौती कर पाएगा?

निवेशकों को अब आरबीआई की आगामी पॉलिसी मीटिंग की कमेंट्री पर नजर रखनी होगी ताकि यह पता चल सके कि वे इस महंगाई को अस्थाई मानते हैं या ढांचागत। कंपनियों के आने वाले अर्निंग्स रिपोर्ट्स में यह देखना अहम होगा कि मैनेजमेंट बढ़ती इनपुट कॉस्ट से निपटने की क्या तैयारी कर रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.