महंगाई का झटका: भारत में Inflation 21 महीने के उच्चतम स्तर **5.6%** पर पहुंची

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AuthorAditya Rao|Published at:
महंगाई का झटका: भारत में Inflation 21 महीने के उच्चतम स्तर **5.6%** पर पहुंची

सितंबर महीने में भारत की कंज्यूमर महंगाई दर उछलकर **5.6%** पर पहुंच गई है, जो पिछले **21 महीनों** का उच्चतम स्तर है। इसकी मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी है। RBI द्वारा हाल ही में रेपो रेट को **5.50%** करने के बाद अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आगे और सख्ती देखने को मिलेगी।

देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सितंबर में हेडलाइन महंगाई दर के 5.6% पर पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले 21 महीनों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह उछाल मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों की वजह से है।

RBI का सख्त रुख

इस डेटा के जारी होने से कुछ दिन पहले ही 7 अक्टूबर 2026 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बड़ा फैसला लिया। MPC ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की, जिससे यह 5.50% हो गया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब दरों में इजाफा किया गया है। साथ ही, RBI ने अपनी पॉलिसी को 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) में बदल दिया है। इसके पीछे की बड़ी वजह ग्लोबल एनर्जी संकट, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और घरेलू स्तर पर खाने-पीने की चीजों की अस्थिरता है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।

निवेशकों और आपकी जेब पर असर

इस बदलाव के दो बड़े मायने हैं:

  1. EMI का बढ़ना: लोन लेने वाले आम ग्राहकों और कंपनियों के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और FMCG जैसे रेट-सेंसिटिव सेक्टरों पर देखने को मिल सकता है।

  2. महंगाई का दबाव: RBI का फोकस अब लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने पर है ताकि उम्मीदों को नियंत्रित किया जा सके।

राहत की बात यह है कि कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) अभी भी स्टेबल बनी हुई है, जो यह संकेत देती है कि महंगाई अभी अर्थव्यवस्था की जड़ों तक नहीं पहुंची है। आने वाले समय में बाजार की नजरें RBI के अगले फैसलों और ग्लोबल कमोडिटी कीमतों पर टिकी रहेंगी कि क्या महंगाई दर पर लगाम लग पाती है या दरों में और बढ़ोतरी की जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.